वीसी से पेशी की अनुमति देने के अनुरोध का केंद्र ने किया विरोध; सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की NSA हिरासत चुनौती पर सुनवाई 15 दिसंबर तक स्थगित की

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में यह आग्रह ठुकरा दिया कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उनकी हिरासत से जुड़े मामले में जोधपुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी जाए।

न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजरिया की पीठ वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंग्मो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि वांगचुक की हिरासत अवैध, मनमानी है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, अंग्मो की ओर से पेश होते हुए, वांगचुक को अदालत से वर्चुअल रूप से जोड़ने की अनुमति देने का अनुरोध किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस अनुरोध का विरोध करते हुए कहा, “हमें पूरे देश के सभी दोषियों को समान सुविधा देनी पड़ेगी।” संक्षिप्त कार्यवाही के बाद अदालत ने सुनवाई 15 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी।

READ ALSO  "मजदूर का पसीना सूखने से पहले मजदूरी मिले"; मद्रास हाईकोर्ट ने 18 साल से लंबित वकील की फीस चुकाने का दिया निर्देश

इससे पहले 24 नवंबर को भी केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने अंग्मो द्वारा दायर प्रत्युत्तर का जवाब देने के लिए समय मांगा था। शीर्ष अदालत ने 29 अक्टूबर को अंग्मो की संशोधित याचिका पर केंद्र और UT प्रशासन से जवाब मांगा था।

अंग्मो की संशोधित याचिका में कहा गया है कि 26 सितंबर को की गई वांगचुक की NSA के तहत हिरासत “पुरानी FIRs, अस्पष्ट आरोपों और अनुमान आधारित दावों” पर आधारित है तथा कथित आधारों से कोई निकट और जीवंत संबंध नहीं रखती। याचिका के अनुसार यह आदेश “कानूनी और तथ्यात्मक आधार से शून्य” है और अधिकारों के दुरुपयोग के समान है, जो संवैधानिक स्वतंत्रताओं और उचित प्रक्रिया पर सीधा प्रहार करता है।

READ ALSO  Article 32 Given Importance as State Without Checks and Balances Has Potential to Become “Tyrannical Institution”: SC Judge

याचिका में यह भी कहा गया कि जमीनी शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में उनके लंबे समय से किए गए कार्य और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के बाद अचानक उन्हें निशाना बनाया जाना “पूरी तरह निराधार” है। इसमें कहा गया कि 24 सितंबर को लद्दाख की राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

केंद्र ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। याचिका का कहना है कि वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख की “तपस्या” और शांतिपूर्ण संघर्ष विफल हो जाएगा।

READ ALSO  Whether Doctrine of Legitimate Expectation Applies to Tax Exemption? SC Delivers Split Verdict

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम केंद्र और राज्यों को यह अधिकार देता है कि वे ऐसे व्यक्ति को हिरासत में ले सकते हैं जो “भारत की रक्षा के प्रति प्रतिकूल” गतिविधियों में शामिल हो सकता है। अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने है, हालांकि इसे पहले भी रद्द किया जा सकता है।

वांगचुक की NSA हिरासत को चुनौती देने वाली यह याचिका अब 15 दिसंबर को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles