राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि अगर गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया जाता है, तो मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड का आदेश बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की पोषणीयता को समाप्त कर देता है। जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस बीरेंद्र कुमार की पीठ याचिकाकर्ता के बेटे
