इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर पुलिस और जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि आयशा मस्जिद में दिन में पांच बार अज़ान दिए जाने में हस्तक्षेप न किया जाए, बशर्ते याचिकाकर्ता यह लिखित आश्वासन दें कि वे Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 और अज़ान के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट के 2020 के फैसले का सख्ती से पालन करेंगे।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने 1 अक्टूबर को सहारनपुर जिले के निवासी शहनवाज खान और पांच अन्य लोगों की याचिका पर यह आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे एक आवेदन के साथ हस्ताक्षरयुक्त नोटरीकृत हलफनामा दाखिल करें। इसमें यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि वे Noise Pollution Rules, 2000 और अफजल अंसारी व दो अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व दो अन्य मामले में दिए गए निर्देशों का पालन करेंगे।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा आवेदन और हलफनामा दाखिल किए जाने पर पुलिस और जिला प्रशासन आयशा मस्जिद में दिन में पांच बार अज़ान दिए जाने में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
हालांकि, बेंच ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि हलफनामे में दी गई अंडरटेकिंग का पालन हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शर्तों का उल्लंघन होने पर प्रशासन कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकता है।
लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर था विवाद
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से आयशा मस्जिद में दिन में पांच बार अज़ान देने और इसके लिए लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी।
उनका कहना था कि न्यायिक फैसलों में निर्धारित शर्तों के तहत लाउडस्पीकर इस्तेमाल की अनुमति होने के बावजूद अधिकारी उन्हें अज़ान के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करने दे रहे हैं।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं को अज़ान देने से नहीं रोका गया है। रोक केवल लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के तरीके पर है, जिसे Noise Pollution Rules, 2000 के अनुसार होना जरूरी है।
राज्य ने बताया कि नियमों में ध्वनि की अनुमत सीमा के साथ-साथ लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने के समय को भी निर्धारित किया गया है। सरकार ने 2020 के अफजल अंसारी मामले में हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया।
2020 के फैसले में क्या कहा था हाईकोर्ट ने
2020 के फैसले में हाईकोर्ट ने कहा था कि अज़ान इस्लाम का आवश्यक हिस्सा हो सकती है, लेकिन लाउडस्पीकर या किसी अन्य ध्वनि-विस्तारक उपकरण के जरिए अज़ान देना धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि ध्वनि-विस्तारक उपकरणों का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और संविधान के भाग III में दिए गए मौलिक अधिकारों से संबंधित प्रावधानों के अधीन रहेगा।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जिला प्रशासन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि-विस्तारक उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे सकता। बिना अनुमति ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल अवैध होगा और अनुमति के लिए दिए गए आवेदनों पर कानून तथा ध्वनि प्रदूषण नियमों के अनुसार फैसला करना होगा।
उस फैसले में यह भी कहा गया था कि मुअज्जिन मस्जिद की मीनार से बिना किसी ध्वनि-विस्तारक उपकरण के अपनी आवाज में अज़ान दे सकता है।
वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को भरोसा दिया कि वे ध्वनि प्रदूषण नियमों और 2020 के फैसले में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन नहीं करेंगे। इसी आधार पर बेंच ने प्रशासन को अज़ान में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया, साथ ही किसी भी उल्लंघन की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई की छूट दी।

