मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका सुनने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराने की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका यूनिवर्सिटी के किसी अधिकृत अधिकारी की ओर से दायर नहीं की गई है, इसलिए यह सुनवाई योग्य नहीं है।

जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उठाई गई प्रारंभिक आपत्ति को स्वीकार करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। याचिका मोहम्मद यूसुफ नामक व्यक्ति ने दायर की थी, जिन्हें रिकॉर्ड में एक व्यवसायी और यूनिवर्सिटी का पैरवीकार बताया गया है।

राज्य सरकार ने उठाई सुनवाई योग्यता पर आपत्ति

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनुपम त्रिवेदी ने दलील दी कि किसी यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व उसके रजिस्ट्रार या किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि कोई बाहरी व्यक्ति या संस्था से असंबद्ध व्यक्ति यूनिवर्सिटी की ओर से याचिका दायर नहीं कर सकता।

कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि राज्य की ओर से उठाई गई आपत्ति में दम है। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायहित में याचिका का निस्तारण किया जाना उचित होगा ताकि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके।

READ ALSO  घरेलू हिंसा साबित न होने और दोनों के असिस्टेंट प्रोफेसर होने पर हाईकोर्ट ने खारिज की गुजारा भत्ते की याचिका

मोरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत से मिली अंतरिम राहत

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद, इसी मामले में सोमवार को मोरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए उसके परिसर की 38 इमारतों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर अंतिम सुनवाई तक रोक लगा दी।

मंडलायुक्त अंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता द्वारा दायर आवेदन पर यह अंतरिम आदेश पारित किया गया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को निर्धारित सुनवाई एक अधिवक्ता के निधन के कारण आयोजित शोकसभा की वजह से नहीं हो सकेगी।

सिंह के अनुसार, यूनिवर्सिटी की ओर से दायर आवेदन स्वीकार कर लिया गया है और अगले आदेश तक किसी भी संरचना को नहीं गिराया जाएगा। यह अंतरिम रोक अंतिम सुनवाई तक प्रभावी रहेगी।

READ ALSO  क्या एकपक्षीय अंतरिम रखरखाव आदेश एकपक्षीय कार्यवाही को निरस्त करने पर रखरखाव का आदेश स्वतः निरस्त हो जाता है? दिल्ली हाईकोर्ट

क्या है पूरा मामला

रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई को समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि वह अपनी 40 में से 38 इमारतों को 15 दिनों के भीतर स्वयं ध्वस्त करे।

प्राधिकरण का आरोप है कि इन इमारतों का निर्माण स्वीकृत भवन मानचित्र के बिना किया गया था। यह ध्वस्तीकरण आदेश उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 27 के तहत जारी किया गया था।

इमारतों को गिराने की निर्धारित समय-सीमा 30 जुलाई को समाप्त हो रही है। इस आदेश के विरोध में यूनिवर्सिटी के छात्र और अन्य लोग धरना भी दे रहे हैं।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles