कुंभ मेले में भगदड़ से मौत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेला प्राधिकरण को मुआवजा दावा 30 दिन में निपटाने का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2025 कुंभ मेले में भगदड़ के दौरान मारी गई महिला के पति की मुआवजे की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और मेला प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि उसका दावा 30 दिनों के भीतर अंतिम रूप से निपटाया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो वह मामले को गंभीरता से लेगा।

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह आदेश याची उदय प्रताप सिंह की ओर से दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनकी पत्नी की मृत्यु 29 जनवरी 2025 की सुबह हुई भगदड़ में हो गई थी। इस हादसे में कम से कम 30 लोगों की जान गई थी।

8 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया कि आयोग ने 17 दिसंबर 2025 को याची का बयान दर्ज कर लिया है और उनका दावा मेला प्राधिकरण के समन्वय में विचाराधीन है। सरकार ने यह भी कहा कि आयोग की समयसीमा इसलिए बढ़ाई गई है क्योंकि कई पीड़ित परिवार देरी से संपर्क कर रहे हैं और उनके बयान लिए जा रहे हैं।

हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा:

“हालांकि इस न्यायालय ने 6 जून 2025 को विस्तृत आदेश पारित कर अधिकारियों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था, अब इस चरण में हम पाते हैं कि याची के मुआवजे के दावे का जल्द से जल्द निस्तारण आवश्यक है।”

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कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आयोग और मेला प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर याची के मुआवजे के दावे को अंतिम रूप दें और अगली सुनवाई की तिथि तक इसका निर्णय अदालत में दाखिल करें। कोर्ट ने राज्य सरकार और मेला प्राधिकरण की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता अनुप त्रिवेदी से यह सुनिश्चित करने को कहा कि अगली तिथि तक अनुपालन हलफनामा दाखिल किया जाए।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो वह “मामले को गंभीर दृष्टिकोण से देखेगा।”

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इससे पहले कोर्ट ने यह भी दर्ज किया था कि याची की पत्नी के शव को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के शवगृह से बिना उचित मजिस्ट्रियल जांच या पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सौंप दिया गया, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

अब यह मामला 18 फरवरी 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जिसमें अनुपालन हलफनामा दाखिल किया जाना है।

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हादसे को लगभग एक साल बीत चुका है और मृतकों के परिजनों को अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है, जिसे लेकर सरकार की आलोचना हो रही थी।

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