इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंशियल सोसायटी में दो टावर पूरी तरह ध्वस्त करने और चार अन्य टावरों की नौवीं एवं दसवीं मंजिल गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रोजेक्ट के बिल्डर पर ₹25 लाख का जुर्माना लगाने के साथ ही अवैध निर्माण से जुड़े मामले में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को टावर संख्या 27 और 28 पूरी तरह ध्वस्त करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा टावर संख्या 16, 17, 18 और 19 की नौवीं और दसवीं मंजिल भी गिराई जाएंगी। यह कार्रवाई दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
हाईकोर्ट ने मंगलवार को साहिबाबाद के मोहन नगर स्थित कटोरी मिल क्षेत्र की गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंशियल सोसायटी से जुड़े मामले में 95 पन्नों का फैसला सुनाया।
ध्वस्तीकरण का खर्च बिल्डर से वसूलेगा GDA
हाईकोर्ट ने GDA को ध्वस्तीकरण पर आने वाला खर्च बिल्डर से भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूलने की अनुमति दी है। साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई के दौरान GDA के अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा और सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
कोर्ट ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह फैसले की तारीख से एक महीने के भीतर ₹25 लाख गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (GGRWA) के खाते में जमा करे।
इसके अलावा बिल्डर को उन 85 व्यक्तियों से प्राप्त बिक्री राशि लौटाने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें सोसायटी के कॉमन एरिया बेचे गए थे।
GDA के उपाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को GDA के उस उपाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसने 18 दिसंबर 2024 के तीसरे कंपाउंडिंग मैप को जारी या मंजूर किया था। इसी नक्शे के जरिए अवैध टावर के निर्माण को स्वीकृति दी गई थी।
कोर्ट ने सरकार को एक महीने के भीतर विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया है।
खंडपीठ ने इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह की जांच पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उचित जांच नहीं की तथा अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं किया।
इस पर हाईकोर्ट ने इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह को निलंबित करने और सक्षम अधिकारी को उनके खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही के मामले में जांच करने का निर्देश दिया।
20 साल बाद भी अधूरा प्रोजेक्ट, हाईकोर्ट ने जताई चिंता
यह मामला गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी के फ्लैट मालिकों और निवासियों की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने कंपाउंडिंग मैप को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि आवासीय परियोजना वर्ष 2005 में शुरू हुई थी, लेकिन 20 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ।
बिल्डर ने अब तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी प्राप्त नहीं किया है, जबकि उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 के तहत इसे हासिल करने की जिम्मेदारी बिल्डर की है।
हाईकोर्ट ने फ्लैट खरीदारों की आर्थिक परेशानियों पर भी गौर किया। कोर्ट ने कहा कि कई लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई घर खरीदने में लगाई है, जबकि अनेक खरीदारों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज लिया है।
खंडपीठ ने माना कि होम लोन की किस्तें चुकाने वाले खरीदारों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे बिल्डर द्वारा कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने तक अनिश्चित समय तक इंतजार करते रहें।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी आर्थिक मजबूरियों के कारण फ्लैट खरीदारों के पास अपने घरों में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, ताकि वे अपना वित्तीय बोझ कुछ कम कर सकें।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण गिराने, बिल्डर से खर्च वसूलने, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और फ्लैट मालिकों से जुड़े वित्तीय भुगतान के निर्देश जारी किए।
