सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार ने अपने कोर्ट से जुड़े अधिकारियों से वकीलों के सीधे संपर्क करने पर रोक लगा दी है। यह निर्देश एक एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) के बेटे द्वारा महिला कोर्ट अधिकारी से फोन पर अभद्र भाषा में बात करने की घटना के बाद दिया गया।
गुरुवार को कोर्ट नंबर 8 में मेंशनिंग के दौरान जस्टिस संजय कुमार ने संबंधित एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड से उनके बेटे के व्यवहार को लेकर सवाल किए। उन्होंने महिला अधिकारी से बातचीत में इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई।
जस्टिस कुमार ने स्पष्ट किया कि अब किसी मामले की सुनवाई समाप्त होने के तुरंत बाद फिजिकल अपीयरेंस उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके लिए कोई भी वकील उनके कोर्ट अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से या फोन पर संपर्क नहीं करेगा।
बेटे के व्यवहार को लेकर वकील से सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस कुमार ने संबंधित वकील से पूछा कि क्या उन्होंने अपने बेटे को महिलाओं से सम्मानपूर्वक बात करना नहीं सिखाया है।
जज ने कहा कि वकील के बेटे ने महिला कोर्ट अधिकारी से बातचीत के दौरान अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसी भाषा इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को सज्जन कहना भी उचित नहीं होगा।
जस्टिस कुमार ने यह भी पूछा कि महिला अधिकारी से फोन पर बात करने वाला व्यक्ति क्या खुद वकील है।
उन्होंने इस घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे कोर्ट अधिकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन को मामला भेजने की बात
जस्टिस संजय कुमार ने कोर्ट में मौजूद लोगों से यह भी पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का कोई निर्वाचित सदस्य वहां उपस्थित है।
इस दौरान उन्होंने मामले को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के पास भेजने की संभावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने संबंधित वकील से उनके बेटे के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए।
जस्टिस कुमार ने कहा कि उनके कोर्ट के अधिकारी पूरी लगन और जिम्मेदारी से अपना काम करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना और आपत्तिजनक बातें कहना उचित नहीं है।
उन्होंने संबंधित वकील को उस समय कोई मामला मेंशन करने से भी मना किया और दोहराया कि अब कोई भी वकील उनके कोर्ट अधिकारियों से सीधे संपर्क नहीं करेगा।
जस्टिस कुमार ने कहा कि इस घटना के कारण सुबह कार्यवाही की शुरुआत में ही उनका धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने कोर्ट अधिकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे।
