इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रविवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए वकील के चैंबर को आंशिक रूप से ढहाए जाने के खिलाफ दायर याचिका को पहले से लंबित एक जनहित याचिका (पीआईएल) के साथ संबद्ध कर दिया है। अदालत का कहना था कि समान मुद्दे पर अलग-अलग या परस्पर विरोधी न्यायिक आदेशों की स्थिति से बचने के लिए दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई जरूरी है।
जस्टिस जसप्रीत सिंह और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की दो सदस्यीय बेंच ने यह आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर तय की है।
मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर बैठी विशेष बेंच
यह याचिका वकील राजेश कुमार दीक्षित की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई थी कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को उनका चैंबर गिराने से रोका जाए। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए चीफ जस्टिस के निर्देश पर रविवार को ही विशेष बेंच का गठन किया गया था।
वकीलों के विरोध के बाद रोकी गई थी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान नगर निगम के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान ने बेंच को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नगर निगम की टीम ने चैंबर के एक हिस्से को गिरा दिया था। हालांकि, मौके पर भारी संख्या में वकीलों के एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर देने के कारण इस कार्रवाई को बीच में ही रोकना पड़ा था।
विरोधी आदेशों से बचने के लिए दोनों याचिकाएं एक साथ जोड़ी गईं
अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि इसी विषय से जुड़ा एक अन्य विवाद पहले से ही जनहित याचिका के रूप में बेंच के समक्ष विचाराधीन है। इस पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि समान मामलों में फैसलों का टकराव नहीं होना चाहिए। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि राजेश कुमार दीक्षित की याचिका को उस लंबित पीआईएल के साथ नत्थी किया जाए, जिस पर अब 26 अक्टूबर को संयुक्त सुनवाई होगी।
