जयपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (जयपुर-द्वितीय) ने पांच रुपये के Lay’s चिप्स के पैकेट में घोषित वजन से काफी कम चिप्स मिलने के मामले में पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (PepsiCo) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का जिम्मेदार ठहराया है। पैकेट पर चिप्स का वजन 15 ग्राम लिखा था, जबकि उसमें केवल 4 ग्राम चिप्स पाए गए।
आयोग के अध्यक्ष अशोक शर्मा और सदस्य अजय कुमार तथा सुप्रिया अग्रवाल की बेंच ने PepsiCo को पैकेट की कीमत पांच रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा, कंपनी को उपभोक्ता की मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए कुल 8,000 रुपये देने का आदेश दिया गया।
क्या था मामला?
जयपुर निवासी चंद्रभान जालान, जो मेसर्स जालान वेल्डिंग एंड हार्डवेयर स्टोर के मालिक हैं, ने 10 नवंबर 2020 को विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र स्थित मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से किराने का सामान खरीदा था।
खरीदे गए सामान में पांच रुपये का Lay’s आलू चिप्स का एक पैकेट भी शामिल था, जिसे वह घर आए मेहमानों को परोसने के लिए लाए थे।
इस खरीद का बिल संख्या 4504T 102009356 था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने चिप्स का सीलबंद पैकेट हाथ में लिया, तो वह असामान्य रूप से हल्का महसूस हुआ।
संदेह होने पर उन्होंने पैकेट का वजन जांचा। पैकेट पर चिप्स का शुद्ध वजन 15 ग्राम लिखा था, लेकिन उसमें केवल 4 ग्राम चिप्स पाए गए। यानी घोषित मात्रा से 73 प्रतिशत से भी अधिक की कमी थी।
शिकायतकर्ता ने जब इस बारे में विक्रेता से संपर्क किया, तो उनके अनुसार, कर्मचारियों ने उनके साथ असभ्य व्यवहार किया और शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
इसके बाद चंद्रभान जालान ने एडवोकेट मीनाक्षी अग्रवाल के माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत 6 अप्रैल 2022 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत संख्या 160/2022 दाखिल की।
उन्होंने उत्पाद में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के आधार पर मुआवजे की मांग की।
विक्रेता ने निर्माता कंपनी को जिम्मेदार बताया
मामले में पहले विपक्षी पक्ष मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से एडवोकेट नावेद रफीक ने अपना पक्ष रखा।
विक्रेता ने उत्पाद खरीदे जाने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि निर्माण संबंधी किसी भी कमी के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
विक्रेता की ओर से दलील दी गई कि चिप्स का पैकेट पूरी तरह सीलबंद था। यदि उसके भीतर घोषित मात्रा से कम चिप्स थे, तो यह निर्माता कंपनी की उत्पादन या पैकेजिंग प्रक्रिया में मशीन से हुई त्रुटि के कारण हो सकता है।
इसलिए ऐसी कमी के लिए PepsiCo जिम्मेदार है, न कि खुदरा विक्रेता।
नोटिस के बावजूद आयोग के सामने पेश नहीं हुई PepsiCo
मामले में दूसरे विपक्षी पक्ष PepsiCo इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को कानूनी नोटिस भेजा गया था।
इसके बावजूद कंपनी आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुई।
इस कारण आयोग ने 22 जुलाई 2022 को कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया।
बाद में PepsiCo ने एडवोकेट अंकित सेठी के माध्यम से 10 अक्टूबर 2023 को एकतरफा आदेश रद्द करने के लिए आवेदन किया।
हालांकि, आयोग ने 8 नवंबर 2023 को यह आवेदन खारिज कर दिया।
कम वजन का सामान बेचकर उपभोक्ताओं से अनुचित लाभ कमाना गलत: आयोग
जिला उपभोक्ता आयोग ने पाया कि निर्माता कंपनी ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का कोई खंडन नहीं किया।
शिकायतकर्ता के दावे को खरीद के बिल और अन्य दस्तावेजों से समर्थन मिला।
आयोग ने बड़ी कंपनियों द्वारा पैकेट पर घोषित मात्रा से कम सामान बेचने की प्रथा पर कड़ी टिप्पणी की।
आयोग ने कहा,
“विपक्षी पक्ष देशभर में दुकानों और बिक्री केंद्रों का विशाल नेटवर्क संचालित करते हैं, जहां प्रतिदिन लाखों उपभोक्ता आते हैं। इतने बड़े स्तर पर निर्धारित वजन से कम सामान बेचकर आम उपभोक्ताओं के खर्च पर करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ कमाया जाता है। ऐसा आचरण सेवा में गंभीर कमी है और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।”
आयोग ने माना कि पूरी तरह सीलबंद पैकेट में निर्धारित मात्रा से कम चिप्स होने की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की थी।
इस आधार पर आयोग ने खुदरा विक्रेता मेट्रो कैश एंड कैरी के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी।
PepsiCo को ₹8,000 मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने PepsiCo इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को चिप्स के पैकेट की पांच रुपये कीमत वापस करे।
इस राशि पर शिकायत दाखिल करने की तारीख 6 अप्रैल 2022 से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने निर्देश दिया कि यह भुगतान शिकायतकर्ता के नाम चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से आयोग में जमा किया जाए।
इसके अलावा, कंपनी को मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 5,000 रुपये मुआवजा तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 3,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया।
इस प्रकार कंपनी को मुआवजे और मुकदमे के खर्च के लिए कुल 8,000 रुपये देने होंगे।
एक महीने में भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त ब्याज
आयोग ने PepsiCo को आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया।
यदि कंपनी निर्धारित समयसीमा में 8,000 रुपये का भुगतान नहीं करती है, तो उसे इस पूरी राशि पर आदेश की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने इस तरह पांच रुपये के चिप्स के पैकेट में निर्धारित मात्रा से कम सामान मिलने के मामले में निर्माता कंपनी को जिम्मेदार ठहराते हुए उपभोक्ता को राहत दी।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: चंद्रभान जालान बनाम मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य
केस नंबर: उपभोक्ता शिकायत संख्या 160/2022
बेंच: अशोक शर्मा (अध्यक्ष), अजय कुमार (सदस्य) और सुप्रिया अग्रवाल (सदस्य)
