इलाहाबाद हाईकोर्ट की एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर एवं आईएलआर समिति ने जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन अलायंस व अन्य बनाम एस. हरीश व अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हिंदी अनुवाद ई-बुकलेट के रूप में जारी किया है।
यह “ई-पुस्तिका स्वरूप में ऐतिहासिक निर्णय” श्रृंखला का छठा संस्करण है। इसे 30 सितंबर 2026 को जारी किया गया। इसमें क्रिमिनल अपील संख्या 2161-2162/2024 में सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर 2024 के फैसले का हिंदी अनुवाद शामिल है।
यह फैसला बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री को डाउनलोड करने, देखने या अपने पास सुरक्षित रखने से जुड़े कानूनी सवाल पर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया था, जिसमें यह कहते हुए चार्जशीट रद्द कर दी गई थी कि ऐसी सामग्री को निजी तौर पर देखना या सुरक्षित रखना, यदि उसे आगे भेजा न गया हो, अपराध नहीं माना जा सकता।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ में तत्कालीन चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक आदेशों और फैसलों में “चाइल्ड पोर्नोग्राफी” जैसे शब्दों के स्थान पर “बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री” यानी CSEAM शब्द का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
कोर्ट ने व्यापक यौन शिक्षा कार्यक्रम लागू करने, पीड़ित बच्चों को सहायता उपलब्ध कराने, अपराधियों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम चलाने और बाल यौन शोषण सामग्री के नुकसान और परिणामों को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने की भी बात कही।
इसके अलावा जोखिम वाले व्यक्तियों की शुरुआती पहचान, समस्याग्रस्त यौन व्यवहार वाले युवाओं के लिए उपचारात्मक उपाय और स्कूलों में स्वस्थ संबंधों, सहमति तथा उचित व्यवहार से जुड़ी शिक्षा देने पर भी जोर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इन सुझावों को लागू करने की प्रक्रिया पर काम करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने को कहा था। कोर्ट ने संसद से पॉक्सो एक्ट की धारा 15(1) में संशोधन पर विचार करने की भी बात कही थी।
ऐतिहासिक फैसलों की श्रृंखला का छठा संस्करण
इससे पहले इस श्रृंखला में चौरी-चौरा मामला, केशव सिंह मामला, आगरा षड्यंत्र मामला, कानपुर बम धमाका मामला और राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी जैसे महत्वपूर्ण मामलों के फैसलों के हिंदी अनुवाद प्रकाशित किए जा चुके हैं।
आगे भी अन्य ऐतिहासिक मामलों के फैसलों के हिंदी अनुवाद प्रकाशित किए जाने की योजना है। इन ई-बुकलेट्स का उद्देश्य महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों को कानूनी शोधकर्ताओं, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, विधि छात्रों और आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध कराना है। इन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ई-एएचसीआर टैब के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
सुवास सेल कर रहा है अनुवाद परियोजना पर काम
एआई आधारित इस अनुवाद परियोजना को प्रयागराज और लखनऊ स्थित सुवास सेल द्वारा चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के संरक्षण में संचालित किया जा रहा है।
परियोजना को एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर एवं आईएलआर समिति का मार्गदर्शन मिल रहा है। समिति के अध्यक्ष जस्टिस अजित कुमार हैं, जबकि जस्टिस समीर जैन, जस्टिस विक्रम डी. चौहान और जस्टिस विवेक कुमार सिंह इसके सदस्य हैं।
ई-बुकलेट के औपचारिक विमोचन के अवसर पर जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी भी मौजूद रहीं। प्रकाशन के अनुसार, उन्होंने अधिवक्ता के रूप में इस मामले में बच्चों के हित में पैरवी की थी और इस ई-बुकलेट की प्रस्तावना भी लिखी है।

