मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अपनी जेल की सजा पूरी कर चुके सभी विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर तक अस्थायी डिटेंशन सेंटर (होल्डिंग सेंटर) में स्थानांतरित किया जाए। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि अपनी तय सजा भुगतने के बावजूद जेलों में बंद विदेशी बंदियों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह सख्त समयसीमा तय की है।
चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू डेंगदोह की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। राज्य सरकार द्वारा अदालत में दाखिल की गई स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30 ऐसे विदेशी नागरिक हैं जिनकी सजा की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन वे अब भी जेलों में बंद हैं।
शिलांग के म्बोस हॉस्टल में बनेगा अस्थायी केंद्र
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि राज्य सरकार ने इस कार्य के लिए शिलांग के लैतुमख्राह स्थित म्बोस (MBOSE) हॉस्टल को अस्थायी डिटेंशन या होल्डिंग सेंटर के तौर पर चिन्हित किया है। इससे पहले सरकार ने नोंगस्टोइन की एक इमारत का प्रस्ताव रखा था, जिस पर अदालत ने असंतोष जाहिर किया था।
रिपोर्ट के अनुसार, यह तीन मंजिला हॉस्टल छह डॉर्मिटरी में फैले लगभग 60 बिस्तरों से युक्त है, जो वर्तमान में हिरासत में मौजूद विदेशी नागरिकों को रखने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है। इस केंद्र पर सुरक्षा और प्रशासनिक कर्मियों के अलावा चिकित्सा दल, सीसीटीवी कैमरे और अग्निशमन उपकरण तैनात रहेंगे। पीठ ने प्रशासन को हिदायत दी कि कैदियों को जल्द से जल्द और हर हाल में 28 सितंबर तक इस नए केंद्र में भेज दिया जाए।
चार कैदियों के निर्वासन की प्रक्रिया जारी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुईं विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) कोलकाता, निधि रानी ने पीठ को बताया कि चार बंदियों के निर्वासन (डिपोर्टेशन) आदेश जारी हो चुके हैं और उन्हें स्वदेश भेजने की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि सजा पूरी कर चुके बाकी विदेशी नागरिकों के मामले में भी जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि इन बंदियों में दो म्यांमार और दो नाइजीरिया के नागरिक हैं, जबकि एक बांग्लादेशी नागरिक पिछले पांच साल से अधिक समय से हिरासत में है।
मुआवजे की रूपरेखा पर रिपोर्ट तलब, अगली सुनवाई 28 को
खंडपीठ ने सजा पूरी होने के बाद भी अवैध रूप से हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों को दिए जाने वाले मुआवजे की कार्यप्रणाली पर राज्य सरकार और एफआरआरओ दोनों से स्पष्ट ब्योरा मांगा है।
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर तय की है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उस दिन व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हों।

