इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद के भीड़भाड़ वाले बाजार में प्रस्तावित क्लॉक टावर के निर्माण की जरूरत पर सवाल उठाते हुए फिलहाल इसके निर्माण पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा दौर में जब लोगों के पास कलाई घड़ी के साथ मोबाइल फोन पर अंतरराष्ट्रीय समय तक उपलब्ध है, तब क्लॉक टावर की प्रासंगिकता पर विचार किया जाना जरूरी है।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीजन बेंच ने संबंधित अधिकारियों से क्लॉक टावर बनाने के फैसले का औचित्य स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी और तब तक निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
यह मामला स्थानीय व्यापारी गौरव गोयल की याचिका पर हाईकोर्ट पहुंचा है। उनकी दुकान पुरानी मंडी, सदर बाजार में उस स्थान के सामने है, जहां क्लॉक टावर बनाने की योजना है। याचिकाकर्ता का कहना है कि निर्माण से उनके कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
क्लॉक टावर की मौजूदा प्रासंगिकता पर कोर्ट ने उठाए सवाल
बेंच ने माना कि जिस दौर में क्लॉक टावर बनाए जाते थे, उस समय उनका महत्वपूर्ण उद्देश्य था और कई पीढ़ियों के लिए वे उपयोगी भी रहे। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वर्तमान समय में पुरानी तकनीक के आधार पर कदम उठाना महज नीतिगत फैसला नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि आज लगभग हर व्यक्ति के पास कलाई घड़ी है और मोबाइल फोन के जरिए अंतरराष्ट्रीय समय तक उसकी पहुंच है। बेंच के मुताबिक, अगर पर्याप्त जगह होती और क्लॉक टावर को केवल सजावटी या स्मारकीय वास्तुकला के रूप में बनाया जाता, तो इसके पीछे कुछ औचित्य समझ में आ सकता था।
बेंच ने मौजूदा समय में पुरानी तकनीक को आधार बनाकर आगे बढ़ने पर सवाल उठाते हुए इसे तर्कहीन और मनमानेपन से जुड़ा कदम बताया।
1970 में क्लॉक टावर के लिए दान की गई थी जमीन
सुनवाई के दौरान फिरोजाबाद नगर निगम ने हाईकोर्ट को बताया कि संबंधित जमीन विशेष रूप से क्लॉक टावर बनाने के उद्देश्य से दान की गई थी।
कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि रामस्वरूप गोविंद राम गोयल ने वर्ष 1970 में यह जमीन क्लॉक टावर के लिए दान की थी। करीब 55 साल बाद इस उद्देश्य को पूरा करने की पहल पर बेंच ने टिप्पणी की कि फिरोजाबाद नगर निगम अब इतने लंबे समय बाद दानकर्ता की इच्छा को अमल में लाने के लिए सक्रिय हुआ है।
हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि जिस जगह जमीन स्थित है, वह अब व्यस्त बाजार का हिस्सा है और वहां पार्किंग की जगह भी उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ता की दुकान भी प्रस्तावित निर्माण स्थल के ठीक सामने है और उनका दावा है कि क्लॉक टावर बनने से उनका कारोबार प्रभावित होगा।
दूसरे समकालीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल हो सकती है जमीन
बेंच ने स्पष्ट किया कि उसका यह कहना नहीं है कि दान की गई जमीन का इस्तेमाल किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
ट्रस्ट कानून से जुड़े साइ-प्रे (cy-près) सिद्धांत का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा कि जमीन का उपयोग किसी ऐसे समकालीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, जिसे फिरोजाबाद नगर निगम उचित समझे।
हालांकि, हाईकोर्ट ने साफ किया कि वह नगर निगम को यह निर्देश नहीं देना चाहता कि जमीन का इस्तेमाल किस खास उद्देश्य के लिए किया जाए, क्योंकि इसका फैसला करना संबंधित अधिकारियों के नीतिगत अधिकार क्षेत्र का विषय है।
दो सप्ताह में मांगा जवाब
याचिकाकर्ता के वकील विजय बहादुर विश्वकर्मा के अनुसार, हाईकोर्ट ने शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव, फिरोजाबाद नगर निगम, नगर आयुक्त, फिरोजाबाद के जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय निदेशक और एक निजी फर्म को नोटिस जारी किया है।
सभी प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल कर प्रस्तावित क्लॉक टावर के निर्माण का औचित्य बताने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर के लिए तय की है और तब तक अधिकारियों को क्लॉक टावर का निर्माण नहीं करने का निर्देश दिया है।

