बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर अब ₹2,000 तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकेंगे। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के दायरे में वॉल्यूम के हिसाब से करीब 96 प्रतिशत UPI ट्रांजैक्शन आने का अनुमान है।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर को जारी गजट अधिसूचना में दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों को इस प्रावधान के तहत शामिल किया है। इनमें ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay से संचालित डेबिट कार्ड के जरिए किए जाने वाले भुगतान शामिल हैं।
अधिसूचना के मुताबिक, इन दोनों माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले किसी भी व्यक्ति पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकता।
केंद्र सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह अधिसूचना जारी की है।
करीब 96 प्रतिशत UPI ट्रांजैक्शन ₹2,000 के दायरे में
₹2,000 की सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI के जरिए होने वाले ज्यादातर भुगतान इसी दायरे में आते हैं। इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, वॉल्यूम के लिहाज से करीब 96 प्रतिशत UPI ट्रांजैक्शन ₹0 से ₹2,000 के बीच होते हैं।
पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतान में भी लगभग यही स्थिति है। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, इस श्रेणी में केवल करीब 4 प्रतिशत ट्रांजैक्शन ₹2,000 से अधिक के होते हैं। यानी लगभग 96 प्रतिशत P2M भुगतान अधिसूचना में तय ₹2,000 की सीमा के भीतर आते हैं।
₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR को लेकर कोई व्यवस्था नहीं
अधिसूचना में ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) तय करने या लागू करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
इसमें केवल ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay आधारित डेबिट कार्ड भुगतान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क लगाने पर रोक लगाई गई है। ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन के लिए किसी चार्जिंग व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया है।
UPI के जरिए होने वाले भुगतान का पैमाना भी लगातार बड़ा बना हुआ है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में UPI के जरिए 24,500 मिलियन से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब ₹29.82 लाख करोड़ रही।

