बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी से जुड़े एक आपराधिक मानहानि मामले में जारी समन को चुनौती दी थी। अदालत ने 2019 में जारी किए गए इस समन को रद्द करने से साफ मना कर दिया। हालांकि, राहत देते हुए अदालत ने अपनी उस पुरानी रोक को छह सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया है, जिसके तहत मजिस्ट्रेट अदालत को मामले की सुनवाई टालने का निर्देश दिया गया था। इससे राहुल गांधी को इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल गया है।
जस्टिस एन आर बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई अवैधता, विकृति या खामी नजर नहीं आती। इसी आधार पर अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
छह साल पुराना है मानहानि का विवाद
यह पूरा मामला 28 अगस्त 2019 का है, जब मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए समन जारी किया था। यह समन खुद को भारतीय जनता पार्टी का सदस्य बताने वाले एम एच श्रीश्रीमाल की आपराधिक मानहानि शिकायत पर जारी हुआ था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी के लिए “कमांडर-इन-थीफ” (चोरों का सरदार) शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा कांग्रेस नेता ने अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था, जिसमें यही टिप्पणी दोहराई गई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह बयान प्रधानमंत्री मोदी, पूरी भाजपा और उनसे जुड़े देश के नागरिकों पर सीधा चोरी का आरोप लगाने जैसा है।
अदालती कार्यवाही और वकीलों की दलीलें
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से पेश वकील सुदीप पासबोला और कुशल मोर ने दलील दी कि यह शिकायत बेबुनियाद है और शिकायतकर्ता को इसे दायर करने का कानूनी अधिकार (लोकस स्टैंडाई) ही नहीं है। बचाव पक्ष का कहना था कि शिकायतकर्ता इस मामले में पीड़ित पक्ष नहीं हैं, इसलिए वह मानहानि का मुकदमा नहीं चला सकते। वहीं दूसरी ओर, शिकायतकर्ता श्रीश्रीमाल ने राहुल गांधी की इस अर्जी का कड़ा विरोध किया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इससे पहले नवंबर 2021 में गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट को मामले की सुनवाई टालने का आदेश दिया था, जिससे राहुल गांधी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से राहत मिल गई थी। मंगलवार के ताजा आदेश के साथ हाईकोर्ट ने इस अंतरिम राहत को छह सप्ताह तक और बढ़ा दिया है, ताकि कांग्रेस नेता सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकें।

