पटना हाईकोर्ट ने वैशाली जिले से दो युवकों को हिरासत में लेकर जाने के मामले में कर्नाटक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस अंतर-राज्यीय कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं के कथित उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों राज्यों के अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने 3 सितंबर को पारित अपने आदेश में इस पूरे घटनाक्रम का ब्योरा तलब किया। पीठ ने बिहार और कर्नाटक, दोनों राज्यों के प्रशासन को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि किन कारणों से और किस तरीके से इन दोनों व्यक्तियों को ले जाया गया, उसका पूरा विवरण दिया जाए। इसके अलावा पीठ ने युवकों के वर्तमान ठिकाने और उनकी गिरफ्तारी के समय अपनाई गई अदालती प्रक्रिया की जानकारी भी साझा करने को कहा है।
ट्रांजिट रिमांड और स्थानीय पुलिस को सूचना न देने का आरोप
यह मामला शत्रुघ्न प्रसाद सिंह द्वारा दायर एक रिट याचिका के जरिए अदालत के संज्ञान में आया। याचिका के अनुसार, कर्नाटक पुलिस ने 12 अगस्त को वैशाली जिले से आलोक अंबानी और अमन कुमार को हिरासत में लिया था।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि दूसरे राज्य से आई पुलिस टीम ने इस कार्रवाई से पहले न तो स्थानीय बिहार पुलिस को कोई सूचना दी और न ही दोनों युवकों को ले जाने के लिए किसी स्थानीय अदालत से आवश्यक ट्रांजिट रिमांड हासिल किया। बिना कानूनी औपचारिकताएं पूरी किए दोनों को राज्य से बाहर ले जाया गया।
मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को तय
अंतर-राज्यीय स्तर पर हिरासत में लेने की निर्धारित प्रक्रिया के कथित उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए खंडपीठ ने दोनों सरकारों को स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
पटना हाईकोर्ट अब 16 सितंबर को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा, जिस दौरान दोनों राज्यों के अधिकारियों द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामों की समीक्षा की जाएगी।

