वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रमों की जांच के निर्देश, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- समाज को सच्चाई जानने का पूरा हक

दिल्ली हाईकोर्ट ने भगोड़े स्वयंभू बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रमों के संचालन और गतिविधियों की व्यापक जांच का निर्देश दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दीक्षित की मौत की जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने साफ किया कि धर्म या आस्था के नाम पर किसी भी संस्थान को जवाबदेही से छूट नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि आश्रम का प्रबंधन संभालने के लिए कोई कानूनी रूप से आगे नहीं आता है, तो राज्य सरकार को इस संस्थान का नियंत्रण अपने हाथ में लेना होगा।

लापता महिला सेवादार के मामले में एफआईआर के आदेश

अदालत ने दिल्ली के विजय विहार थाना प्रभारी (एसएचओ) को रोहिणी स्थित ‘आध्यात्मिक विश्व विद्यालय’ से गायब हुई एक महिला के संबंध में गुमशुदगी का मामला दर्ज कर तत्काल जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। महिला का सामान और बैग आश्रम परिसर में ही मौजूद हैं, लेकिन उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हाईकोर्ट ने पुलिस को जांच पूरी कर 31 अगस्त की अगली सुनवाई तक अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है।

यह निर्देश लापता महिला के गंभीर रूप से बीमार और बुजुर्ग माता-पिता की याचिका पर आया है। अस्पताल में भर्ती पिता ने बताया कि उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए अपनी बेटी से बात की थी, जिसमें उसकी तबीयत भी खराब नजर आ रही थी, लेकिन उसने परिजनों के पास लौटने से मना कर दिया।

संस्थान की जवाबदेही और वित्तीय स्रोतों पर सवाल

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सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि अदालतें धार्मिक मान्यताओं या आध्यात्मिक गतिविधियों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करतीं जब तक कि लोक व्यवस्था (पब्लिक ऑर्डर) प्रभावित न हो। हालांकि, संस्थागत जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने आश्रम के प्रबंधन पर कड़े सवाल उठाते हुए पूछा कि संस्थापक के फरार रहने के दौरान नाबालिगों और महिला निवासियों को बिना किसी जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवस्था के कैसे छोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही पीठ ने आश्चर्य जताया कि आयकर विभाग ने अब तक आश्रम के खातों और उसके वित्तीय स्रोतों की जांच क्यों नहीं की।

मामले की पृष्ठभूमि और लगे आरोप

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यह मामला वर्ष 2017 में गैर-सरकारी संगठन ‘फाउंडेशन फॉर Social Empowerment’ और पीड़ित परिवारों द्वारा दायर याचिकाओं पर आधारित है। मूल याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी स्थित आश्रम में कई महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है और उन्हें उनके परिजनों से अलग कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह दावा भी किया कि आश्रम में रहने वाली महिलाओं को नशीली दवाएं दी जाती हैं, जिससे वे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने या सहमति देने की स्थिति में नहीं रहतीं।

इससे पहले सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया था कि यौन शोषण के आरोपी वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ दुष्कर्म के दो मामले दर्ज किए गए थे और उसे गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमों का गठन कर विभिन्न आश्रमों और फार्महाउसों पर छापेमारी की गई थी।

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