अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी और चोरी उजागर करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ गाज़ियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया है। शीर्ष अदालत इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई करेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष पत्रकार के वकील ने इस याचिका का विशेष उल्लेख करते हुए तुरंत सुनवाई की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने याचिका की तकनीकी कमियों को दुरुस्त किए जाने की शर्त पर इसे मंगलवार को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान पत्रकार के वकील ने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ एक के बाद एक कई एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं और हाल ही में उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की सख्त धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। अदालत को सूचित किया गया कि 20 अगस्त की रात पुलिस ने पत्रकार के घर पर छापा मारा और अगले दिन 21 अगस्त की शाम पांच बजे भी पुलिस बल वहां पहुंचा। लगातार हो रही इस पुलिस कार्रवाई को देखते हुए अदालत से तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई।
गाज़ियाबाद पुलिस केस और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
यह पूरा विवाद 18 अगस्त को गाज़ियाबाद के शिप्रा मॉल के पास हुई एक कथित रोड रेज घटना से जुड़ा है। पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के अनुसार, एक बाइक सवार ने उनकी कार को छू दिया था और इसके बाद आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर कॉल कर दिया। इस शिकायत के आधार पर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाने में उनके खिलाफ रोड रेज और गाली-गलौज के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई।
उपाध्याय का कहना है कि यह एफआईआर पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे आरोपों पर आधारित है, जिसका मकसद उनकी स्वतंत्र पत्रकारिता के कारण उन्हें प्रताड़ित करना है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें एफआईआर की कॉपी तक मुहैया नहीं कराई है। इसके अलावा, घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज को मिटाने के लिए पुलिस आसपास के दुकानदारों पर दबाव बना रही है। पत्रकार ने गाज़ियाबाद पुलिस से सार्वजनिक रूप से उस जगह के सीसीटीवी फुटेज जारी करने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
हाईकोर्ट न जाकर सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचने का कारण
अपनी याचिका में अभिषेक उपाध्याय ने आशंका जताई है कि प्रभावी कानूनी सुरक्षा मिलने से पहले उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उत्तर प्रदेश की राज्य मशीनरी से जुड़े तत्वों द्वारा उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसी डर और सुरक्षा चिंताओं के कारण वे इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की स्थिति में नहीं थे और उन्होंने सीधे देश की शीर्ष अदालत का रुख किया।
कानूनी प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गाज़ियाबाद पुलिस की एफआईआर को रद्द करने का अनुरोध किया है। वैकल्पिक राहत के तौर पर उन्होंने मांग की है कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस से हटाकर दिल्ली पुलिस या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपी जाए।
राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी की रिपोर्टिंग का मामला
अभिषेक उपाध्याय एक स्वतंत्र यूट्यूब चैनल का संचालन करते हैं और उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार तथा शासन से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चंदे के प्रबंधन में अनियमितताओं और चंदा चोरी से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे किए थे। उनका दावा है कि इसी रिपोर्टिंग के प्रतिशोध के रूप में उनके खिलाफ गाज़ियाबाद में रोड रेज का झूठा मामला गढ़ा गया है।

