सावरकर क्विज विवाद: केरल हाईकोर्ट से शिक्षक को राहत, निलंबन पर अंतरिम रोक

कासरगोड। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वी.डी. सावरकर से जुड़े एक सवाल को लेकर निलंबित किए गए प्राइमरी स्कूल के शिक्षक गुरुप्रसाद राय के. को केरल हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने शिक्षक के निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, हालांकि इस मामले में चल रही विभागीय जांच जारी रहेगी।

जस्टिस बीजू अब्राहम की एकल पीठ ने 19 अगस्त को कासरगोड जिले के पल्लाथडका स्थित ऐडेड अपर प्राइमरी स्कूल (एयूपीएस) के शिक्षक गुरुप्रसाद राय की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए शिक्षक को निलंबित रखना आवश्यक नहीं है। जांच के दौरान निलंबन एक विवेकाधीन कदम है, न कि कोई अनिवार्य प्रक्रिया। अदालत अब इस मामले में 18 सितंबर को अगली सुनवाई करेगी।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 6 अगस्त को कुंबला और मंजेश्वरम उप-जिलों में लोअर-प्राइमरी स्तर के छात्रों के लिए आयोजित ‘सोशल साइंस क्लब फ्रीडम क्विज 2026’ से शुरू हुआ था। प्रतियोगिता के पांच टाई-ब्रेकर सवालों में से एक सवाल था कि ब्रिटिश शासन के दौरान किस स्वतंत्रता सेनानी को सबसे अधिक सजा मिली थी। आयोजकों की ओर से इसका उत्तर वी.डी. सावरकर दिया गया था।

सवालों के घेरे में उत्तर आने के बाद शिक्षा विभाग ने इस पर जांच बैठाई। इसके बाद स्कूल मैनेजर को शिक्षक के खिलाफ अनुशासनत्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया, जिसके तहत शिक्षक को निलंबित कर आरोप पत्र (मेमो ऑफ चार्जेस) सौंपा गया।

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अदालत में दोनों पक्षों के तर्क

हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में गुरुप्रसाद राय ने तर्क दिया कि क्विज के लिए सवाल तैयार करना किसी भी तरह से अनुशासनहीनता या कदाचार की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा कि सावरकर ने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जेल में लंबा समय बिताया था और केवल समाज के एक वर्ग के विरोध के चलते यह कार्रवाई की गई है।

शिक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतियोगिता से पहले प्रश्नपत्र सहायक शिक्षा अधिकारी (एईओ) को भेजा गया था। अधिकारी ने बिना किसी आपत्ति के इसे विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्यों को वितरित कर दिया था। इसके बावजूद शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी ओर, राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह निर्णय किसी राजनीतिक विचारधारा पर आधारित नहीं है। अपने जवाबी हलफनामे में विभाग ने तर्क दिया कि सावरकर को सबसे अधिक सजा मिलने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत है। सरकार के अनुसार, शिक्षक ने लापरवाही बरतते हुए विवादित प्रश्न शामिल किया जिससे जनता में शिकायतें हुईं। सरकार ने केरल शिक्षा अधिनियम की धारा 12ए और संबंधित नियमों का हवाला देते हुए निलंबन को सही ठहराया।

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हाईकोर्ट के मुख्य अवलोकन

अदालत ने पाया कि जब सहायक शिक्षा अधिकारी को प्रश्नपत्र की सामग्री के बारे में पहले से जानकारी थी और उन्होंने इसे आगे वितरित किया, तो उन पर कोई सवाल क्यों नहीं उठाया गया। इसके अलावा, राज्य सरकार ने जिस तथ्य-अन्वेषण रिपोर्ट का हवाला दिया, वह न तो मूल निलंबन आदेश में दर्ज थी और न ही अदालत में प्रस्तुत की गई थी।

हाईकोर्ट ने सावरकर से जुड़े उत्तर की ऐतिहासिक सत्यता या शिक्षक की कथित लापरवाही पर कोई निर्णय नहीं दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सवाल-जवाब सही था या नहीं, इसका फैसला जारी विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगा।

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