कर्नाटक हाईकोर्ट ने वाल्मीकि विकास निगम घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राज्य के कैबिनेट मंत्री बी नागेंद्र को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तों में ढील देते हुए उन्हें बिना निचली अदालत की पूर्व अनुमति के भारत में कहीं भी यात्रा करने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, विदेश यात्रा के लिए उन्हें ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मंत्री पद के कर्तव्यों का हवाला
14 अगस्त को जारी अपने आदेश में जस्टिस एम नागाप्रसन्ना ने कहा कि हर बार राज्य से बाहर यात्रा करने के लिए अदालत से अनुमति मांगने की बाध्यता मंत्री की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करती है और उनके प्रशासनिक व सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न करती है।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान मंत्री नागेंद्र की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के एन फणींद्र ने तर्क दिया कि मंत्री पद के दायित्वों के कारण उन्हें अक्सर राज्य के बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में हर यात्रा के लिए निचली अदालत में बार-बार आवेदन दाखिल करना व्यावहारिक नहीं है।
दूसरी ओर, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अरविंद कामथ ने इस राहत का विरोध करते हुए कहा कि नागेंद्र पिछले दो वर्षों से यात्रा अनुमति के लिए निचली अदालत में आवेदन करते रहे हैं, इसलिए जमानत की शर्तों में बदलाव के लिए भी उन्हें उसी अदालत का रुख करना चाहिए था। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा नागेंद्र की जमानत पूरी तरह रद्द करने की मांग वाली याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है।
घोटाले की पृष्ठभूमि और कैबिनेट में वापसी
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद नागेंद्र ने जून 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जून में ही उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ 89.63 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। बाद में, 3 अगस्त को नागेंद्र को पुनः राज्य मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया।
यह पूरा मामला 26 मई 2024 को तब सामने आया, जब निगम के एक लेखा अधिकारी ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद बेंगलुरू स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एम जी रोड शाखा में जमा निगम के 187 करोड़ रुपये के सरकारी कोष से 94.73 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के खातों में भेजी गई थी राशि
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के अनुसार, निगम के धन को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में स्थित 18 प्राथमिक बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। जांच एजेंसियों ने इन खातों का संबंध सत्यनारायण वर्मा और उनके सहयोगियों से जोड़ा है, जो 2022 के छत्तीसगढ़ वित्तीय घोटाले में भी आरोपी हैं। इन प्राथमिक खातों के जरिए रकम को 170 से अधिक द्वितीयक खातों में भेजा गया और फिर वहां से निकाल लिया गया।
एसआईटी जब नागेंद्र और निगम के तत्कालीन अध्यक्ष व कांग्रेस विधायक बसनागौड़ा डड्डल की भूमिका की जांच कर रही थी, उसी दौरान ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत अपनी अलग जांच शुरू की थी।

