पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपनी जान और स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग लेकर पहुंचे एक लिव-इन कपल को कम से कम तीन महीने तक हर 15 दिन में संबंधित थाना प्रभारी (SHO) के सामने पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने महिला से यह भी कहा है कि वह रोज अपने माता-पिता से बात करे और उन्हें अपनी कुशलता की जानकारी देती रहे।
जस्टिस आलोक जैन ने 17 सितंबर को यह आदेश दोनों याचिकाकर्ताओं से बातचीत करने के बाद पारित किया। कपल ने याचिका में कुछ निजी प्रतिवादियों से अपनी जान और स्वतंत्रता को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।
कोर्ट ने दर्ज किया कि महिला अपने साथी की पृष्ठभूमि के बारे में पूरी तरह अवगत नहीं दिखी। इसी आधार पर दोनों को अपने मोबाइल नंबर चालू रखने और अपना पता संबंधित SHO को देने का निर्देश भी दिया गया।
कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं से की बातचीत
दोनों याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के 11 सितंबर के एक पूर्व आदेश के बाद अदालत के सामने पेश हुए थे। उनसे बातचीत के बाद जस्टिस जैन ने 17 सितंबर के आदेश में कहा कि महिला अभी जीवन की बारीकियों को पूरी तरह समझने की स्थिति में नहीं दिखती।
याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे निजी प्रतिवादियों से कथित खतरे के मद्देनजर दोनों याचिकाकर्ताओं की जान और स्वतंत्रता की रक्षा करें।
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा 25 अगस्त को दी गई शिकायत की जांच की जा चुकी है। महिला के माता-पिता के बयान भी दर्ज किए गए और जांच में किसी खतरे की पुष्टि नहीं हुई।
महिला को रोज माता-पिता से संपर्क रखने का निर्देश
याचिकाकर्ताओं की कम उम्र को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने महिला को निर्देश दिया कि वह प्रतिदिन अपने माता-पिता से बात करे और उन्हें अपनी कुशलता के बारे में जानकारी देती रहे। हालांकि, आदेश में दोनों याचिकाकर्ताओं की उम्र का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
कोर्ट ने महिला के माता-पिता को भी यह छूट दी कि यदि उन्हें उसकी कुशलता को लेकर कोई आशंका हो तो वे तुरंत संबंधित SHO को इसकी जानकारी दे सकते हैं।
ऐसी स्थिति में SHO को महिला की कुशलता की जांच और पुष्टि करने का निर्देश दिया गया है।

