दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम की उस याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट तलब की, जिसमें उन्होंने अपनी डॉक्टरेट (पीएचडी) थीसिस पूरी करने के लिए पेन ड्राइव में मौजूद अध्ययन सामग्री तक पहुंच की अनुमति मांगी है।
जस्टिस संजीव नरूला ने मामले की सुनवाई करते हुए जेल अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख मुकर्रर की। फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद इमाम ने अदालत से आग्रह किया है कि उन्हें जेल परिसर के भीतर एक स्टैंडअलोन कंप्यूटर पर शोध सामग्री देखने की अनुमति दी जाए। इस याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि कंप्यूटर पर इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं होगी और वह जेल कर्मियों की सीधी निगरानी में ही अपना काम करेंगे।
जेल में बिना इंटरनेट वाले कंप्यूटर पर शोध कार्य की मांग
अदालत में इमाम के वकील ने दलील दी कि जनवरी 2020 में गिरफ्तारी के समय वह अपने शोध के अंतिम वर्ष में थे। वकील के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) दोनों उनके पीएचडी सिनॉप्सिस को पहले ही अपनी मंजूरी दे चुके हैं।
वहीं, दिल्ली पुलिस के विशेष लोक अभियोजक ने पीठ को बताया कि राज्य ने निचली अदालत के समक्ष भी इस अकादमिक मांग का विरोध नहीं किया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पूर्व में सिर्फ जेल प्रशासन ने पेन ड्राइव के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई थी, जबकि किताबों के अध्ययन पर कोई विरोध नहीं था। लोक अभियोजक ने अदालत से कहा कि यदि आरोपी शोध सामग्री पहले जेल अधिकारियों को जांच के लिए दिखाने को तैयार हैं, तो जेल प्रशासन की निगरानी में उन्हें यह अनुमति दी जा सकती है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा और यूएपीए मामला
शरजील इमाम को फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की कथित ‘बड़ी साजिश’ के सिलसिले में 25 अगस्त 2020 को आतंकवाद विरोधी कानून ‘गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने उन्हें इस साजिश के प्रमुख आरोपियों में से एक माना है।
गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान राजधानी के उत्तर-पूर्वी इलाके में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी। इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

