खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर मामले में ओला पर जुर्माना, उपभोक्ता आयोग ने दिया पूरा पैसा लौटाने का आदेश

केरल के कासरगोड जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक को एक ग्राहक को खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर का पूरा पैसा लौटाने और मुआवजा देने का निर्देश दिया है। नए स्कूटर में बार-बार तकनीकी कमियां आने और स्थानीय स्तर पर सर्विस न मिलने पर आयोग ने कंपनी को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया। आयोग ने बेंगलुरु स्थित मुख्यालय और स्थानीय डीलरशिप दोनों को संयुक्त रूप से 30 दिनों के भीतर ₹1.3 लाख का रिफंड, ₹25,000 मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा और ₹5,000 कानूनी खर्च चुकाने का आदेश जारी किया है।

बार-बार खराबी और 100 किमी की दूरी

शिकायतकर्ता ने 22 मई 2023 को ₹1.3 लाख की कीमत वाला ‘ओला एस1 प्रो जेन 2’ इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा था। इसके लिए उन्होंने ₹71,259 का डाउन पेमेंट किया और बाकी रकम बैंक लोन के जरिए चुकाई थी। मानक 40,000 किलोमीटर वारंटी के अलावा, उपभोक्ता ने ₹8,000 का अतिरिक्त भुगतान करके 8 साल या 80,000 किलोमीटर तक की विस्तारित वारंटी भी ली थी।

हालांकि, खरीदारी के कुछ ही महीनों के भीतर वाहन में गंभीर परिचालन कमियां आने लगीं। स्कूटर का पिछला शॉक एब्जॉर्बर बार-बार खराब होने लगा, और बैटरी का चार्ज एक तय प्रतिशत से नीचे गिरते ही वाहन अपने आप बंद होने लगा।

जब उपभोक्ता मरम्मत के लिए पास के पय्यन्नूर स्थित सर्विस सेंटर पहुंचे, तो कर्मचारियों ने शॉक एब्जॉर्बर ठीक करने में असमर्थता जताई। इस बीच कासरगोड की स्थानीय डीलरशिप भी बंद हो गई, जिसके कारण उपभोक्ता को मरम्मत कराने के लिए लगभग 100 किलोमीटर दूर मंगलुरु जाना पड़ा। अपने काम-काज की व्यस्तताओं और स्कूटर की लगातार अनिश्चितता से परेशान होकर पीड़ित को दूसरा वाहन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे उन्हें बैंक लोन के ब्याज के रूप में लगभग ₹16,000 का नुकसान उठाना पड़ा और कुल मिलाकर करीब ₹2.5 लाख का वित्तीय झटका लगा। पीड़ित ने आयोग में कुल ₹2 लाख का मुआवजा और ₹50,000 का नुकसान का दावा किया था।

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एकतरफा सुनवाई और कंपनी की अनुपस्थिति

आयोग के अध्यक्ष कृष्णन के और सदस्य बीना केजी की पीठ ने 30 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि वारंटी अवधि के दौरान शिकायत दर्ज कराने के बावजूद ग्राहक को उचित सेवा प्रदान नहीं की गई।

कानूनी कार्यवाही के दौरान बेंगलुरु स्थित ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड को 5 मार्च 2026 को आधिकारिक नोटिस तामील कराया गया था, लेकिन कंपनी की ओर से कोई लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके चलते आयोग ने मामले में एकतरफा (एक्स-पार्टी) फैसला सुनाया। वहीं, अनंगूर (कासरगोड) स्थित स्थानीय स्टोर को भेजा गया नोटिस दुकान बंद होने के कारण बिना डिलीवर हुए वापस लौट आया था। पीड़ित उपभोक्ता ने आयोग में हलफनामा देकर स्पष्ट किया कि वे अब इस दोषपूर्ण वाहन का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं।

वारंटी शर्तों और उपभोक्ता अधिकारों पर सख्त टिप्पणी

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मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के विस्तारित वारंटी दस्तावेज में शामिल अनुचित शर्तों पर कड़ा ऐतराज जताया। दस्तावेज में एक प्रावधान था जिसके तहत कंपनी के पास वारंटी के नियमों और शर्तों में कभी भी एकतरफा बदलाव करने का अधिकार सुरक्षित था।

आयोग ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यावसायिक संस्थान केवल अपनी वेबसाइट पर नीतिगत अपडेट पोस्ट करके जिम्मेदारी से नहीं बच सकता और न ही ग्राहकों से यह उम्मीद की जा सकती है कि वे नियम जांचने के लिए नियमित रूप से वेबसाइट देखते रहें। आयोग ने ऐसी कार्यप्रणाली को उपभोक्ता अधिकारों के विपरीत और कानूनी रूप से अमान्य घोषित किया।

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