महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने साल 2018 में हुए एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 34 वर्षीय स्टोर मैनेजर के परिवार को 63.8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने ट्रक मालिक और बीमा कंपनी को याचिका दायर करने की तिथि से पूरी राशि के भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ यह राशि संयुक्त रूप से चुकाने का निर्देश दिया।
हादसे और पुलिस कार्रवाई का ब्योरा
यह याचिका मृतक शरद गायकवाड़ की पत्नी, उनके दो बच्चों और माता-पिता की ओर से दायर की गई थी। 4 जून 2018 को नासिक-मुंबई हाईवे पर मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर जा रहे गायकवाड़ को एक तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और कुछ दिनों बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने ट्रक चालक रामएकबाल राजितराम मिश्रा के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।
बीमा कंपनी की आपत्तियां
सुनवाई के दौरान श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने इस दावे का विरोध किया। बीमा कंपनी ने हादसे में बीमित ट्रक की संलिप्तता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि घटना की औपचारिक प्राथमिकी (एफआईआर) 29 दिनों की देरी से 3 जुलाई 2018 को दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा कंपनी ने चालक की पहचान पर संदेह जताया और पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया।
ट्रिब्यूनल का रुख और निर्णय
ट्रिब्यूनल के सदस्य आर वी मोहिते ने शुक्रवार को बीमा कंपनी के इन तर्कों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर हादसे के बाद परिजनों की पहली प्राथमिकता घायल व्यक्ति का इलाज और उसकी देखभाल होती है, न कि तुरंत पुलिस थाने पहुंचना। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि जब दावा पुलिस चार्जशीट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से सिद्ध होता है, तो केवल एफआईआर में हुई देरी को दुर्घटना में वाहन की संलिप्तता से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। मृतक की 23,800 रुपये मासिक आय और उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए ट्रिब्यूनल ने ट्रक मालिक राजाराम आर गुप्ता और बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान का निर्देश जारी किया।

