CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में चीफ गेस्ट बनाने पर NALSAR के छात्रों ने जताई आपत्ति, यूनिवर्सिटी से फैसले पर दोबारा विचार की मांग

NALSAR यूनिवर्सिटी के कई बैचों के छात्रों ने आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को चीफ गेस्ट के रूप में बुलाए जाने पर आपत्ति जताई है। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को अलग-अलग ज्ञापन देकर इस फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। उनकी आपत्ति दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘चलो संसद’ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान CJI की कुछ कथित टिप्पणियों को लेकर है।

अब तक छात्रों की ओर से कम से कम छह ज्ञापन यूनिवर्सिटी प्रशासन को दिए गए हैं। पहला ज्ञापन 23 जुलाई को वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रोफेसरों और प्रशासन को भेजा गया था। इसके बाद पांच अन्य बैचों के छात्रों ने भी अलग-अलग ज्ञापन देकर पहली चिट्ठी में उठाई गई चिंताओं का समर्थन किया।

2026-27 बैच के दीक्षांत समारोह की तारीख अभी तय नहीं हुई है। NALSAR में परंपरागत रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश को दीक्षांत समारोह में संबोधन के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई की टिप्पणियों पर आपत्ति

छात्रों की आपत्ति उस सुनवाई से जुड़ी है जिसमें ‘चलो संसद’ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था।

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23 जुलाई के ज्ञापन में छात्रों ने सुनवाई के दौरान हुई एक बातचीत का जिक्र किया है। इसमें वकील ने कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाने की पेशकश की थी। इस पर CJI सूर्यकांत की ओर से कथित तौर पर कहा गया, “हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।”

छात्रों ने एक अन्य कथित टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें वकील से कहा गया था, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना समय भी बर्बाद मत कीजिए।”

छात्रों का कहना है कि इन्हीं टिप्पणियों के बाद उन्होंने दीक्षांत समारोह के चीफ गेस्ट के चुनाव पर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, यूनिवर्सिटी में उन्हें संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कपूर्ण तरीके से विचार करने जैसे मूल्यों की शिक्षा दी गई है। ऐसे में प्रदर्शनकारी नागरिकों के खिलाफ पुलिस ज्यादती के गंभीर आरोपों पर कथित तौर पर अपनाए गए रुख को लेकर उन्हें असहजता है।

अलग-अलग बैचों से पहुंचे छह ज्ञापन

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पहले ज्ञापन के बाद पांच अन्य बैचों के छात्रों ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन से संपर्क किया। इन ज्ञापनों में 23 जुलाई को उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए प्रशासन से कहा गया कि चीफ गेस्ट के नाम पर अंतिम फैसला लेने से पहले छात्रों की आपत्तियों पर विचार किया जाए।

छात्रों का दावा है कि हर ज्ञापन पर करीब 70 से 80 छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस आधार पर उनका कहना है कि करीब 350 से 450 छात्र इस मांग के समर्थन में हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्टूडेंट बार काउंसिल से जुड़े एक छात्र ने कहा कि उनका विरोध भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद को लेकर नहीं है। छात्र के मुताबिक, वे CJI के पद का सम्मान करते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी में संविधान और संवैधानिक मूल्यों की शिक्षा लेने के बाद वे ऐसी किसी बात का समर्थन नहीं करना चाहते जो उनकी नजर में उन मूल्यों के खिलाफ हो।

प्रशासन से बातचीत के लिए भी तैयार छात्र

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छात्रों ने केवल आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, बल्कि इस मुद्दे पर यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ बातचीत की पेशकश भी की है। पहले ज्ञापन में प्रशासन से चीफ गेस्ट के चुनाव पर गंभीरता से दोबारा विचार करने का अनुरोध किया गया है।

छात्रों ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर उनके प्रतिनिधि प्रशासन के साथ बैठक कर सकते हैं या यूनिवर्सिटी जिस दूसरे माध्यम को उचित समझे, उसके जरिए इस मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है।

छात्रों के मुताबिक, अब तक उनके ज्ञापनों पर यूनिवर्सिटी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

वाइस चांसलर श्रीकृष्ण देवा राव से इस मामले में प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी, जबकि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार के बारे में बताया गया कि उन्हें ऐसे किसी ज्ञापन की जानकारी नहीं थी।

फिलहाल 2026-27 बैच के दीक्षांत समारोह की तारीख भी तय नहीं हुई है।

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