कर्नाटक हाईकोर्ट ने अदालत की कार्यवाही के दौरान ट्रायल कोर्ट के फैसले को “मैच फिक्सिंग” का नतीजा बताने और बाद में हाईकोर्ट के उस आदेश को झूठा, मनगढ़ंत और जाली कहने वाले एक वकील को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराते हुए 15 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। जस्टिस डी के सिंह और जस्टिस एच. शांति भूषण की डिवीजन बेंच ने वकील के खिलाफ लगाए गए दोनों आरोपों को साबित माना।
हाईकोर्ट ने उसे तत्काल हिरासत में लेने का निर्देश दिया। साथ ही रजिस्ट्री को आदेश की प्रति बार काउंसिल को भेजने को कहा, ताकि यह तय करने के लिए उचित कार्यवाही की जा सके कि वह वकालत जारी रखने के योग्य है या नहीं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह स्वतः संज्ञान से शुरू हुई आपराधिक अवमानना की कार्यवाही 15 सितंबर 2025 को Criminal Appeal No. 1054 of 2018 में पारित एक आदेश से जुड़ी थी।
उस आदेश में हाईकोर्ट ने दर्ज किया था कि अपीलकर्ता के वकील को अभियोजन द्वारा भरोसा किए गए परिस्थितिजन्य तथ्यों के संबंध में लिखित सिनॉप्सिस दाखिल करने और उनसे जुड़े गवाहों तथा दस्तावेजों का विवरण देने के लिए कहा गया था। समय लेने के बावजूद यह सिनॉप्सिस दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद भी अदालत ने मामले की सुनवाई शुरू की।
आदेश के अनुसार, जब अदालत ने वकील से सवाल किए तो उसने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने फैसला “मैच फिक्सिंग” करके दिया है। हाईकोर्ट ने उसे इस तरह की टिप्पणी नहीं करने की चेतावनी दी और कहा कि ट्रायल कोर्ट के खिलाफ ऐसे निराधार और अपमानजनक आरोप अवमानना के दायरे में आ सकते हैं। इसके बावजूद वह अपने आरोप पर कायम रहा।
हाईकोर्ट ने उस समय कहा था:
“इस तरह के आचरण से उसने ट्रायल कोर्ट को बदनाम करने का प्रयास किया और अदालत की गरिमा बनाए रखने में विफल रहा, जिससे Contempt of Courts Act, 1971 के प्रावधान लागू होते हैं।”
इसके बाद मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया था। इसी आधार पर Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 15 और संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत स्वतः संज्ञान से आपराधिक अवमानना की कार्यवाही दर्ज हुई।
पहले बिना शर्त माफी की बात कही, बाद में कार्यवाही लड़ने का फैसला
10 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान वकील ने कहा था कि वह अपने आचरण और संबंधित पत्र को लेकर बिना शर्त माफी मांगते हुए हलफनामा दाखिल करेगा।
हालांकि बाद की सुनवाई में उसने अपना रुख बदल लिया। उसने कोर्ट को बताया कि वह अवमानना की कार्यवाही का मुकाबला करना चाहता है और बिना शर्त माफी नहीं मांगेगा।
अवमानना नोटिस के जवाब में दाखिल आपत्तियों में उसने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ पेश सामग्री झूठी, मनगढ़ंत और जाली है तथा उसे आपराधिक अवमानना के मामले में फंसाने के लिए तैयार की गई है। उसने यह भी कहा कि पूरी कार्यवाही इसलिए की गई ताकि वह लंबित आपराधिक अपील में अपीलकर्ता की ओर से वकील के रूप में पेश न हो सके।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस जवाब के जरिए वकील ने 15 सितंबर 2025 के आदेश पर भी सवाल उठाए और उसे झूठा, मनगढ़ंत तथा जाली बताया।
हाईकोर्ट ने दो आरोप तय किए
पहला आरोप अदालत में की गई “मैच फिक्सिंग” वाली टिप्पणी से संबंधित था। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के बारे में इस तरह का आरोप अदालत की कार्यवाही को बदनाम करने और न्यायालय की गरिमा तथा अधिकार को कम करने की प्रवृत्ति रखता है।
दूसरा आरोप वकील द्वारा अपने शपथपत्र में हाईकोर्ट के 15 सितंबर 2025 के आदेश को झूठा, मनगढ़ंत और जाली बताने से जुड़ा था। बेंच ने कहा कि ऐसा बयान भी अदालत की कार्यवाही को बदनाम करने और उसके सम्मान तथा अधिकार को कम करने की प्रवृत्ति रखता है।
‘मैच फिक्सिंग’ टिप्पणी पर दी गई सफाई कोर्ट ने नहीं मानी
आरोपों पर अपना बचाव रखते हुए वकील ने कहा कि “मैच फिक्सिंग” का उसका संदर्भ जांच अधिकारी और सरकारी वकील के लिए था।
हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना नोटिस के जवाब में दाखिल उसकी आपत्तियों में ऐसा कोई रुख नहीं लिया गया था।
हाईकोर्ट के आदेश को झूठा, मनगढ़ंत और जाली बताने के संबंध में उसने इसे टाइपिंग की गलती बताया। हालांकि बेंच ने नोट किया कि उसने इसके लिए कोई माफी नहीं मांगी, बिना शर्त माफी तो दूर की बात है।
बेंच ने निष्कर्ष निकाला:
“इसलिए हम उसके खिलाफ दोनों आरोप साबित पाते हैं।”
15 दिन का साधारण कारावास
हाईकोर्ट ने वकील के आचरण और अदालत के सामने उसके व्यवहार को देखते हुए उसे 15 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई और तत्काल हिरासत में लेने का निर्देश दिया।
रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) को High Court of Karnataka (Contempt of Court Proceedings) Rules, 1981 के Rule 16 के तहत दोषसिद्धि वारंट जारी करने को कहा गया। रजिस्ट्री को आदेश की मुफ्त प्रति वकील को तत्काल उपलब्ध कराने और मामले को उचित कार्यवाही के लिए बार काउंसिल को भेजने का भी निर्देश दिया गया।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: High Court of Karnataka v. Sri H.P. Sabjan
केस नंबर: Criminal Contempt Petition No. 2 of 2026
बेंच: जस्टिस डी के सिंह और जस्टिस एच. शांति भूषण
तारीख: 18 सितंबर 2026

