पटना हाईकोर्ट ने बिहार के भोजपुर जिले में एक साल पहले पुलिस हिरासत से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए राजमिस्त्री सनोज कुमार के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्थानीय पुलिस की कार्यशैली को पक्षपातपूर्ण और घोर लापरवाही से भरा करार दिया।
पुलिस के दावे को हाईकोर्ट ने खारिज किया
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने 7 अगस्त को दिए अपने आदेश में कहा कि यह एक दुर्लभ और असाधारण मामला है, जिसमें निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता है। अदालत ने स्थानीय पुलिस के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सनोज चलती गाड़ी से कूदकर भाग गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि जिस वाहन से बंदियों को ले जाया जा रहा था, उसके दरवाजे बाहर से बंद किए गए थे। ऐसे में पीछे का दरवाजा खुले बिना किसी बंदी का कूदकर भागना पूरी तरह असंभव था।
फोन कॉल और मारपीट के गंभीर आरोप
यह मामला 13 अगस्त 2025 का है, जब बिहिया थाना क्षेत्र के धरहरा मुसहर टोली स्थित काली मंदिर के पास से उत्पाद पुलिस ने शराब पीने के आरोप में सनोज कुमार को पकड़ा था। हिरासत में लिए जाने की शाम सनोज ने अपने परिवार को दो बार फोन किया। पहली कॉल में उसने पकड़ाए जाने की जानकारी दी, जबकि दूसरी कॉल में उसने बताया कि पुलिसकर्मी उसकी बेरहमी से पिटाई कर रहे हैं। इसके तुरंत बाद फोन कट गया। अगले दिन जब पिता गौरी शंकर राम बिहिया थाने पहुंचे, तो पुलिस अधिकारी बेटे के बारे में कोई जवाब नहीं दे सके। बाद में सनोज की मोटरसाइकिल घटनास्थल के पास लावारिस हालत में पाई गई थी।
जांच में शिथिलता और बयानों में विरोधाभास
मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी राज्य की जांच एजेंसी ने कोई तत्परता नहीं दिखाई। स्थानीय गवाहों से समय पर पूछताछ नहीं की गई, मुख्य गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज नहीं कराए गए और संदिग्धों से पूछताछ व वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में लंबा समय गंवा दिया गया। अदालत ने यह भी नोट किया कि उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने बार-बार अपने बयान बदले। जांच में सामने आया कि वाहन के निजी चालक ने सनोज के गले में गमछा डालकर उसे खींचा था और उनके बीच हाथापाई हुई थी। हाईकोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि आरोपी बनाए गए दो सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) स्थानीय जांच को प्रभावित करने की स्थिति में थे।
आरोपियों की सूची और सीबीआई को मिले अधिकार
मामले में उत्पाद विभाग के सब-इंस्पेक्टर धीरज कुमार, एएसआई राजू कुमार, होमगार्ड धर्मेंद्र पासवान, उमेश कुमार यादव व राजू कुमार और चालक राजू कुमार सिंह, विकास कुमार व सुरेंद्र कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया है।
अपने बेटे की खोज के लिए पिता गौरी शंकर राम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आदेश के तहत अब सीबीआई के प्रतिष्ठित अधिकारियों की एक टीम नए सिरे से मामले की पड़ताल करेगी। केंद्रीय एजेंसी को पूर्व में जांच से जुड़े रहे पुलिस अधिकारियों से पूछताछ करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है। सीबीआई को 11 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट (एटीआर) अदालत में पेश करनी होगी।

