आरटीआई कानून में संशोधन के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के जरिए सूचना का अधिकार (RTI) कानून में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर और अधिवक्ता प्रशांत भूषण की दलीलें सुनने के बाद यह निर्देश दिया। इसके बाद शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सरकार का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

धारा 8(1)(j) में बदलाव को चुनौती

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अदालत के समक्ष दायर याचिकाओं में विशेष रूप से आरटीआई कानून की धारा 8(1)(j) में किए गए संशोधनों को चुनौती दी गई है। यह धारा व्यक्तिगत जानकारी के खुलासे से जुड़ी छूट से संबंधित है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन बदलावों से पारदर्शिता तंत्र कमजोर हुआ है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि हालिया विधायी संशोधनों के माध्यम से व्यक्तिगत डेटा से जुड़े मामलों में सार्वजनिक हित (पब्लिक इंटरेस्ट) के तहत मिलने वाली छूट और सुरक्षा मानक को हटा दिया गया है, जिससे सूचना हासिल करने का अधिकार प्रभावित हो रहा है।

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