सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को एक निजी कंपनी की बकाया रकम लौटाने के लिए ठोस योजना पेश करने का आखिरी मौका दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अभिनेता को अपनी रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश देते हुए उन्हें सरेंडर करने से मिली अंतरिम राहत 5 अक्टूबर तक बढ़ा दी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर के लिए तय की है। सुनवाई के दौरान पीठ ने अभिनेता के पुराने रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि यादव अभिनय और नाटक करने में माहिर हैं, लेकिन यह अदालत है। पीठ ने कहा कि पहले दिए गए अदालती आदेशों का पालन नहीं किया गया और उनका आचरण भरोसा पैदा नहीं करता, फिर भी उन्हें राहत देते हुए यह अंतिम अवसर दिया जा रहा है।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी. एस. पटवालिया ने अदालत से कर्ज चुकाने का ठोस खाका तैयार करने के लिए दो सप्ताह की मोहलत मांगी। उन्होंने पीठ को आश्वस्त किया कि अभिनेता अपनी नीयत और निष्ठा साबित करने के लिए दो करोड़ रुपये जमा कराएंगे। वरिष्ठ वकील ने यह भी दलील दी कि यादव पहले ही साढ़े चार महीने जेल में काट चुके हैं और अब फिल्म उद्योग में उनके साथी इस आर्थिक संकट से बाहर निकलने में उनकी मदद करेंगे।
वहीं, शिकायतकर्ता कंपनी मैसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजीत सिन्हा ने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य अपनी फंसी हुई रकम वसूलना है, क्योंकि यादव बार-बार अपने वादों से मुकरते रहे हैं।
इससे पहले 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने यादव की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा था कि रजिस्ट्री में पांच करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त पर ही उन्हें आत्मसमर्पण से छूट दी जाएगी।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला और जुर्माना
इससे पूर्व 10 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामलों में यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने याचिका दायर करने में 1,894 दिन—यानी पांच साल से भी अधिक—की असाधारण देरी को माफ करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी छह महीने की कैद की सजा घटाकर तीन महीने कर दी थी।
अपने 108 पन्नों के फैसले में हाईकोर्ट ने कहा था कि अदालत की ओर से समझौते के गंभीर प्रयासों के बावजूद यादव ने भुगतान करने के अपने वचनों का बार-बार उल्लंघन किया और बाद में कोई भी अतिरिक्त राशि देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने की अर्जी भी खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने अभिनेता को सभी सात शिकायतों में से प्रत्येक में शिकायतकर्ता को 1.04 करोड़ रुपये और राज्य को 25 हजार रुपये देने का निर्देश दिया था। साथ ही यह स्पष्ट किया था कि यादव द्वारा पहले जमा कराए जा चुके करीब दो करोड़ रुपये इस राशि में समायोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, अदालत ने उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव पर प्रत्येक मामले में करीब 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और जुर्माना न भरने की स्थिति में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा तय की थी। हाईकोर्ट ने अपील दायर करने का समय देते हुए अपनी सजा पर दो महीने की अंतरिम रोक लगाई थी।
2010 से चल रहा है वित्तीय विवाद
यह पूरा विवाद वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी एक फिल्म के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स से पांच करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता ली थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 2012 में हुए एक समझौते के तहत यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ब्याज सहित लगभग 11 करोड़ रुपये लौटाने पर सहमत हुए थे।
इसके बाद वर्ष 2013 में यादव ने देनदारी चुकाने के लिए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक जारी किए, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने कानूनी रास्ता अपनाया। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभिनेता को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी, जिसे 2019 में सेशंस कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

