‘100 प्रतिशत शुद्ध’ और ‘100 प्रतिशत प्राकृतिक’ जैसे दावों वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के खाद्य सुरक्षा नियामक (एफएसएसएआई) के आदेश के खिलाफ डाबर इंडिया लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एफएसएसएआई के इस निर्देश को रद्द करने की मांग को लेकर डाबर की ओर से गुरुवार, 6 अगस्त को वरिष्ठ वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया। इस मामले पर शुक्रवार को जस्टिस स्वरना कांता शर्मा की पीठ के सामने सुनवाई तय की गई है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एक आदेश जारी कर डाबर इंडिया को ऐसे सभी उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने का निर्देश दिया था, जिन पर ‘100 फीसदी’ के दावे किए जा रहे हैं। नियामक के अनुसार, कंपनी की वेबसाइट पर बिक्री के लिए उपलब्ध शहद, गाय का घी, खाद्य तेल, ऐप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल का दूध जैसे उत्पादों पर ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योरिटी गारंटेड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वाटर’ जैसे भ्रामक दावे लिखे पाए गए हैं।
एफएसएसएआई ने बिक्री रोकने और 15 दिनों में रिपोर्ट देने का दिया निर्देश
एफएसएसएआई का कहना है कि खाद्य उत्पादों के प्रचार में ‘100 प्रतिशत’ शब्द का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन है। नियामक के मुताबिक ऐसे दावे अस्पष्ट, अपरिभाषित और ग्राहकों को भ्रमित करने वाले हैं। एफएसएसएआई ने डाबर को चिन्हित खाद्य पदार्थों और इसी तरह के दावे करने वाले अन्य सभी उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने तथा 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) सौंपने का निर्देश दिया था।
प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन और बिना नोटिस कार्रवाई का डाबर ने लगाया आरोप
अपनी याचिका में डाबर इंडिया ने दलील दी है कि एफएसएसएआई ने यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए पारित किया है। कंपनी के अनुसार, रोक लगाने से पहले उसे न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। डाबर का तर्क है कि एफएसएसएआई के पास इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं है और यह फैसला बिना सोचे-समझे व अस्पष्ट तरीके से लिया गया है।
इसके अलावा, डाबर ने अदालत को बताया कि खाद्य क्षेत्र की कई अन्य बड़ी कंपनियां भी विभिन्न श्रेणियों में ‘100%’ शब्द का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसे में एफएसएसएआई द्वारा सार्वजनिक रूप से यह आदेश जारी करने से बाजार में डाबर ब्रांड की छवि को नुकसान पहुंचा है।

