मॉर्गेज डीड के बाद बिना कारण लोन खारिज करना एचडीएफसी बैंक को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने लगाया 47,500 रुपये का जुर्माना

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने एचडीएफसी बैंक की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए उस पर 47,500 रुपये का जुर्माना लगाया है। बैंक ने एक कारोबारी से जमीन के बंधक (मॉर्गेज) दस्तावेज निष्पादित करवाने के महज 13 दिन बाद बिना कोई कारण बताए उनका 1.99 करोड़ रुपये का व्यावसायिक लोन खारिज कर दिया था। आयोग ने बैंक के इस रवैये को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार आचरण माना है।

मॉर्गेज प्रक्रिया पूरी कराने से जगी लोन की जायज उम्मीद

हमीरपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा, सदस्य स्नेह लता और जोगिंदर महाजन की पीठ ने 17 जुलाई को फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि बैंक जब किसी ग्राहक को मॉर्गेज डीड निष्पादित करने, जमीन के रिकॉर्ड जमा करने और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश देता है, तो इससे ग्राहक के मन में लोन स्वीकृत होने की एक जायज उम्मीद (लेगिटिमेट एक्सपेक्टेशन) पैदा होती है। इसके बाद बिना किसी ठोस और वस्तुनिष्ठ कारण के आवेदन खारिज कर देना बैंक के मनमानेपन और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।

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सितंबर 2024 में दाखिल किया गया था आवेदन

यह मामला हमीरपुर स्थित अर्चित ट्रेडिंग कंपनी के प्रोपराइटर तिलक राज सोनी से जुड़ा है। उन्होंने नया व्यावसायिक स्टोर खोलने के लिए सितंबर 2024 में एचडीएफसी बैंक में 1,99,90,000 रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था। बैंक अधिकारियों के निर्देश पर उन्होंने जमीन के दस्तावेज एकत्र किए और 9 अक्टूबर 2024 को बैंक के पक्ष में मॉर्गेज डीड भी निष्पादित कर दी। इस दौरान बैंक अधिकारियों ने कई बार कारोबारी के ठिकाने का दौरा किया, स्टॉक व इमारत का निरीक्षण किया और वित्तीय दस्तावेज हासिल किए। हालांकि, 22 अक्टूबर 2024 को बैंक ने बिना कोई स्पष्ट कारण बताए लोन आवेदन निरस्त कर दिया।

दूसरे बैंक ने 10 दिन में पास कर दिया लोन

आयोग ने इस बात पर भी गौर किया कि एचडीएफसी बैंक द्वारा लोन खारिज किए जाने के बाद एक अन्य व्यावसायिक बैंक ने उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर महज 10 दिनों के भीतर समान राशि का लोन स्वीकृत कर वितरित भी कर दिया। आयोग ने कहा कि यह स्थिति स्पष्ट रूप से एचडीएफसी बैंक की कार्यप्रणाली में प्रशासनिक मनमानेपन और मूल्यांकन में निष्पक्षता की कमी को उजागर करती है।

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नोटिस के बाद भी पेश नहीं हुआ बैंक

उपभोक्ता आयोग ने बताया कि इस मामले में एचडीएफसी बैंक को औपचारिक नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन बैंक ने कानून द्वारा तय 45 दिनों की अवधि के भीतर कोई लिखित जवाब दाखिल नहीं किया। सुनवाई के दौरान भी बैंक का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता के शपथ पत्र और सबूतों को सही माना।

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25 लाख रुपये के नुकसान का दावा खारिज

शिकायतकर्ता तिलक राज सोनी ने दलील दी थी कि लोन खारिज होने के कारण उनका स्टोर जनवरी 2025 के बजाय अप्रैल 2025 में खुल सका, जिससे उन्हें लगभग 25 लाख रुपये के व्यवसाय का नुकसान हुआ। हालांकि, आयोग ने इस दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि अनुमानित नुकसान की बात काल्पनिक है और इसके समर्थन में कोई ऑडिट की गई बैलेंस शीट या ठोस वित्तीय दस्तावेज पेश नहीं किए गए।

मुआवजे और कानूनी खर्च का भुगतान करने का आदेश

मामले का निपटारा करते हुए जिला आयोग ने एचडीएफसी बैंक को मानसिक प्रताड़ना और सेवा में कमी के एवज में 40,000 रुपये का मुआवजा तथा 7,500 रुपये मुकदमेबाजी का खर्च अदा करने का निर्देश दिया है।

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