हेब्बल टनल प्रोजेक्ट पर कर्नाटक हाईकोर्ट सख्त, पर्यावरण रिपोर्ट न देने पर रोक की चेतावनी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु के हेब्बल फ्लाईओभर जंक्शन पर प्रस्तावित 1,385 करोड़ रुपये की टनल परियोजना को लेकर राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार हेब्बल झील और उसके जल प्रवाह पर इस निर्माण के पड़ने वाले प्रभावों का ब्योरा देने वाला हलफनामा समय पर दाखिल नहीं करती, तो परियोजना पर रोक लगा दी जाएगी।

अदालत का कड़ा रुख और हलफनामे का निर्देश

मुख्य न्यायाधीश विभू बाखरू और जस्टिस के. एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या बेंगलुरु नॉर्थ स्थित 143 एकड़ में फैली हेब्बल झील पर परियोजना के प्रभाव का अध्ययन किया गया है। इसके अलावा, अदालत ने यह भी बताने का निर्देश दिया कि क्या किसी अध्ययन में टनल के कारण पानी की आवक-जावक में रुकावट या भूमिगत जल प्रवाह प्रभावित होने की आशंका की जांच की गई है।

मौखिक टिप्पणी करते हुए खंडपीठ ने सावधान किया कि यदि अगली सुनवाई की तय तिथि 20 अगस्त तक जवाब दाखिल करने में देरी हुई, तो परियोजना के काम पर तुरंत रोक लगा दी जाएगी।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें और कानूनी विवाद

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यह कानूनी चुनौती तीन स्थानीय निवासियों—गुरुप्रसाद आर. के., ऋषवंजस राघवन और एलिजाबेथ सौम्या—द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद सामने आई है। याचिकाकर्ताओं की वकील स्नेहा नागराज ने अदालत में तर्क दिया कि टनल का मार्ग सीधे झील के कैचमेंट क्षेत्र (टैंक बेड) के नीचे से गुजरता है, जहां कई महत्वपूर्ण स्टॉर्मवॉटर ड्रेन मौजूद हैं।

अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार की अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में भी स्वीकार किया गया है कि निर्माण कार्य से झील में पानी का प्रवाह प्रभावित होगा। वकील ने अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए कहा कि झील क्षेत्र के नीचे काम शुरू करने से पहले कोई वैज्ञानिक या हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन नहीं कराया गया।

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2025 का संशोधन और पर्यावरणीय मांगें

विवाद का एक मुख्य केंद्र जल निकायों से संबंधित कानून में किया गया बदलाव है। कर्नाटक टैंक संरक्षण एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2014 की मूल धारा 12 के तहत झील के 30 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध था। हालांकि, वर्ष 2025 में पारित एक विधायी संशोधन के जरिए अधिकारियों को विशिष्ट निर्माण की अनुमति देने का अधिकार मिल गया, बशर्ते झील की मूल क्षमता और प्राकृतिक जल प्रवाह में कोई बाधा न आए।

याचिका में इस 2025 के संशोधन को संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन बताते हुए असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही, याचिकाकर्ताओं ने तीन-लेन वाली इस द्वि-दिशात्मक भूमिगत मार्ग परियोजना की डीपीआर को रद्द करने, स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा हाइड्रोलॉजिकल, बाढ़-जोखिम और समग्र पर्यावरण प्रभाव आकलन कराने तथा क्षेत्र में प्रस्तावित लगभग 890 पेड़ों की cut-down पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

यातायात की समस्या और टनल परियोजना का विवरण

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यह 2.5 किलोमीटर लंबी ‘कट-एंड-कवर’ टनल राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा बेल्लारी रोड पर यातायात के भारी दबाव को कम करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है, जहां सड़क को चौड़ा करना संभव नहीं है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) और बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडीए) द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित की जा रही यह 1,385 करोड़ रुपये की टोल-फ्री परियोजना 18 महीने में पूरी होनी है।

प्रस्तावित मार्ग हेब्बल फ्लाईओभर जंक्शन से शुरू होकर गांधी कृषि विज्ञान केंद्र (जीकेवीके) परिसर से होते हुए कर्नाटक पशुचिकित्सा, पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय तक जाएगा। परियोजना के तहत बेल्लारी रोड के मध्य मेखरी सर्किल पर बिना सतह के यातायात को बाधित किए एक अंडरपास तथा हेब्बल झील के दोनों तरफ सड़कों के साथ-साथ जीकेवीके परिसर में भूमिगत मार्ग का निर्माण शामिल है।

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