हेल्थ डेटा हैकिंग मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीआई और पंजाब सरकार से मांगा जवाब

मोहाली स्थित हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेसिंग कंपनी ‘वितराया टेक्नोलॉजीज’ के डेटा में कथित सेंधमारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीआई और पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत कंपनी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें प्रतिस्पर्धी कंपनियों द्वारा साइबर हमले के जरिए नागरिकों के व्यक्तिगत व मेडिकल डेटा की चोरी का आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है।

कंपनी ने बताई विदेशी फंड से जुड़ी कंपनियों की भूमिका

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया। अदालत में कंपनी का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने बताया कि आंतरिक फोरेंसिक जांच में इस डेटा ब्रीच के स्रोत और इसके पीछे शामिल संस्थाओं का पता लगा लिया गया है।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट के वकील ने रियलिटी शो की "अश्लील" सामग्री को लेकर यूट्यूबर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई

याचिका में कहा गया है कि कंपनी देश भर के नागरिकों के आधार, पैन कार्ड, मेडिकल हिस्ट्री और क्लेम से जुड़े बेहद संवेदनशील दस्तावेज डिजिटल रूप से सुरक्षित रखती है। फरवरी 2025 में कंपनी के सर्वर पर अचानक से बड़े पैमाने पर साइबर हमला हुआ। इसमें अनधिकृत पहुंच, ब्रूट-फोर्स लॉगिन के प्रयास और ग्राहकों के गोपनीय रिकॉर्ड की मास डाउनलोडिंग की गई। फोरेंसिक जांच में मिले आईपी एड्रेस और सर्वर लॉग्स के आधार पर यह पाया गया कि इस हमले के पीछे विदेशी फंड के स्वामित्व वाली प्रतिस्पर्धी कंपनियां और उनसे जुड़े लोग शामिल हैं।

पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

READ ALSO  7 साल तक अपराध मुक्त रहने के बाद गुंडा घोषित करने का कोई औचित्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

कंपनी ने आरोप लगाया कि 5 मार्च 2025 को ही पुलिस को आईपी एड्रेस, सर्वर डेटा और संदिग्धों के नामों के साथ विस्तृत शिकायत दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने मामला दर्ज करने में लगभग छह महीने का समय लगा दिया।

एस.ए.एस. नगर (मोहाली) स्थित पंजाब स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 29 अगस्त 2025 को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 66 और 66(बी) के तहत प्राथमिकी (FIR No. 16/2025) दर्ज की। हालांकि, याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने ठोस नाम और तकनीकी सबूत मिलने के बावजूद केवल “अज्ञात व्यक्तियों” के खिलाफ एक औपचारिकता के तौर पर प्राथमिकी दर्ज की।

READ ALSO  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट  ने 78 वर्षीय महिला को डाक मतपत्र से मतदान करने की अनुमति दी

सीबीआई जांच की मांग क्यों?

याचिकाकर्ता के अनुसार, स्थानीय पुलिस ने मामले में न तो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को जब्त किया, न ही साक्ष्यों को सुरक्षित किया और न ही किसी प्रकार की हिरासत में पूछताछ की। कंपनी का कहना है कि यह मामला देश भर के नागरिकों के संवेदनशील स्वास्थ्य और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और त्वरित जांच केवल सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles