19 साल से अधिक समय से अलग रह रहे एक दंपत्ति के विवाह को भंग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने तलाक का आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि लंबे समय से टूट चुके रिश्ते को जबरन बनाए रखना पति और पत्नी दोनों के प्रति क्रूरता के समान है। 5 अगस्त को दिए अपने आदेश में हाईकोर्ट ने नवंबर 2021 के निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी गई थी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पति को आदेश दिया कि वह तीन महीने के भीतर अपनी पत्नी को 10 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता (एलिमनी) एकमुश्त अदा करे।
एक ही इमारत में दो दशक से अलग रह रहा था दंपत्ति
जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों पक्ष करीब दो दशक से एक ही इमारत में रहने के बावजूद अलग-अलग जीवन जी रहे हैं। पति अपने भाई के मकान की पहली मंजिल पर रहता है, जबकि पत्नी उसी संपत्ति के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर निवास करती है।
अदालत ने माना कि वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुका है और इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है। इसके बाद पीठ ने निचली अदालत का फैसला निरस्त करते हुए हाईकोर्ट रजिस्ट्री को जल्द से जल्द तलाक की डिक्री जारी करने का निर्देश दिया।
वित्तीय जानकारी छिपाने पर एलिमनी की मांग घटाई
स्थायी गुजारा भत्ते के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान पति ने 7 लाख रुपये देने की पेशकश की थी, जबकि पत्नी ने 40 लाख रुपये की मांग रखी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने अंतिम राशि 10 लाख रुपये तय की।
अदालत ने पत्नी की 40 लाख रुपये की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि उसने अपने संपत्ति संबंधी हलफनामे में महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी छिपाई थी। यद्यपि उसने अपने हलफनामे में लगभग 200 वर्ग मीटर कृषि भूमि के स्वामित्व की बात स्वीकार की थी, लेकिन अपने वेतन और बैंक खातों का ब्योरा दर्ज नहीं किया था। सुनवाई के दौरान पेश किए गए एक अनुभव प्रमाण पत्र से सामने आया कि वह एक निजी स्कूल में पढ़ाती है और प्रतिमाह करीब 39,000 रुपये कमाती है। इस कारण पीठ ने कहा कि पत्नी द्वारा जमा किए गए वित्तीय ब्योरे पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
दोनों पक्षों की वित्तीय स्थिति और भविष्य के प्रावधान
अदालत ने दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति का ब्योरा दर्ज करते हुए उल्लेख किया कि पति एक क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर के रूप में कार्यरत है और उसका मासिक वेतन लगभग 1.16 लाख रुपये है। वहीं, शिक्षिका के रूप में कार्यरत पत्नी को सेवानिवृत्ति के बाद प्रोविडेंट फंड (पीएफ) और नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत पेंशन लाभ प्राप्त करने की पात्रता होगी।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने दंपत्ति की 25 वर्षीय बेटी का भी जिक्र किया, जो एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद फिलहाल 30,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड पर इंटर्नशिप कर रही है। सुनवाई के दौरान पति ने अदालत में औपचारिक शपथ पत्र दिया कि यदि बेटी आगे पढ़ाई करना चाहती है, तो वह उसकी उच्च शिक्षा और उसकी शादी का पूरा खर्च खुद वहन करेगा।

