इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम के बाहर कुछ अधिवक्ताओं द्वारा नारेबाजी और शोरगुल करने को गंभीरता से लेते हुए उनके आचरण को पूरी तरह अवमाननापूर्ण बताया है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को CCTV फुटेज के जरिए संबंधित अधिवक्ताओं की पहचान कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने 28 अक्टूबर 2026 को कोर्ट संख्या 66 में देवेंद्र कुमार की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विशेष अदालत से शिकायत होने के कारण अधिवक्ताओं को दूसरी अदालतों की कार्यवाही में बाधा डालने या अदालत को डराने वाली भाषा का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान हुई नारेबाजी
देवेंद्र कुमार की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह राजपूत उपस्थित हुए।
उन्होंने 5 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुपालन में ट्रायल के दौरान दर्ज गवाहों के बयान रिकॉर्ड पर लाने के लिए समय मांगा।
राज्य की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता (AGA) डी.पी.एस. चौहान उपस्थित थे।
कोर्ट ने समय देने का अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को 19 नवंबर 2026 को नए सिरे से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
इसी दौरान कोर्ट संख्या 66 के बाहर गलियारे में कुछ अधिवक्ता तेज आवाज में बोलने और नारे लगाने लगे।
अधिवक्ता मन्नू शर्मा ने कोर्ट को बताया कि अधिवक्ता कोर्ट संख्या 49 में एक वकील की गरिमा से संबंधित घटना का विरोध कर रहे थे। विरोध में शामिल कुछ अधिवक्ता कोर्ट रूम के बाहर गलियारे में नारेबाजी कर रहे थे।
दूसरी अदालतों की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करती हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि गरीब वादी अपनी शिकायतों के समाधान के लिए हाईकोर्ट आते हैं।
बेंच ने कहा:
“केवल इसलिए कि कुछ अधिवक्ताओं को किसी विशेष अदालत से समस्या है, उन्हें नारे लगाने, चिल्लाने और दूसरी अदालतों की कार्यवाही में बाधा डालने तथा ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिनकी प्रकृति अदालत को डराने-धमकाने वाली हो।”
कोर्ट ने अधिवक्ताओं के इस आचरण को पूरी तरह अनुचित बताया।
आदेश में कहा गया:
“इसलिए इस कोर्ट का मत है कि कुछ अधिवक्ताओं का ऐसा आचरण पूरी तरह अवमाननापूर्ण है।”
CCTV फुटेज से पहचान कर रिपोर्ट देने का आदेश
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को निर्देश दिया कि कोर्ट संख्या 66 के बाहर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग प्राप्त की जाए।
फुटेज के आधार पर नारेबाजी में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान कर अगली सुनवाई की तारीख तक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहचान होने के बाद संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जा सकता है।
इसके अतिरिक्त अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को भेजने का निर्देश दिया, ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
जमानत अर्जी पर अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: Devendra Kumar v. State of U.P.
केस नंबर: Criminal Misc. Bail Application No. 32917 of 2026
पीठ: जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल
आदेश की तारीख: 28 अक्टूबर 2026
