इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत में दाखिल होने वाली याचिकाओं और अन्य दस्तावेजों की टाइपिंग तथा फॉर्मेटिंग को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। अब अंग्रेजी में दाखिल होने वाले दस्तावेज Times New Roman फॉन्ट में, साइज 14 और डबल लाइन स्पेसिंग के साथ तैयार करने होंगे। बोल्ड और इटैलिक अक्षरों के इस्तेमाल को भी सीमित कर दिया गया है।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया है कि 12 नवंबर 2026 से इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ और लखनऊ पीठ के स्टाम्प रिपोर्टिंग सेक्शन इन नियमों के अनुसार दस्तावेजों की जांच करेंगे।
यह आदेश प्रयागराज में हाउस टैक्स के निर्धारण से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
वकीलों के लिए क्या हैं नए नियम?
हाईकोर्ट ने याचिकाओं, अपीलों, आवेदनों और रिवीजन सहित सभी संबंधित दस्तावेजों के लिए निम्न निर्देश दिए हैं।
- अंग्रेजी दस्तावेज: सभी याचिकाएं, शपथपत्र, जवाबी शपथपत्र, प्रत्युत्तर शपथपत्र, जवाब, आवेदन और अन्य अभिवचन Times New Roman फॉन्ट, साइज 14 और डबल लाइन स्पेसिंग में तैयार होंगे।
- हिंदी दस्तावेज: हिंदी में दाखिल दस्तावेजों के लिए Unicode फॉन्ट, साइज 14 और डबल लाइन स्पेसिंग की व्यवस्था जारी रहेगी।
- बोल्ड अक्षर: बोल्ड का इस्तेमाल केवल याचिका और इंडेक्स में संलग्नकों (Annexures) को चिह्नित करने या उनका विवरण देने के लिए किया जा सकेगा।
- इटैलिक अक्षर: इटैलिक का इस्तेमाल केवल दस्तावेज में उद्धृत अंशों और अदालतों या वैधानिक प्रावधानों के संदर्भों के लिए किया जा सकेगा।
- प्रार्थना खंड: याचिका में मांगी गई राहत या प्रार्थना वाले हिस्से को इटैलिक में नहीं लिखा जा सकेगा।
- मार्जिन: हाईकोर्ट के लागू नियमों और ई-फाइलिंग निर्देशों के अनुसार मार्जिन रखना अनिवार्य होगा।
ये निर्देश भौतिक रूप से दाखिल दस्तावेजों पर भी समान रूप से लागू होंगे।
बोल्ड अक्षरों के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा:
“अभिवचन के किसी अन्य हिस्से को बोल्ड अक्षरों में नहीं लिखा जाएगा।”
इटैलिक के संबंध में कोर्ट ने निर्देश दिया:
“प्रार्थना या राहत वाले खंड को इटैलिक में नहीं लिखा जाएगा।”
याचिका के प्रार्थना खंड में इटैलिक अक्षरों से उठा सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित याचिका का प्रार्थना खंड इटैलिक अक्षरों में टाइप किया गया था, लेकिन स्टाम्प रिपोर्टिंग सेक्शन ने इसे त्रुटि के रूप में दर्ज नहीं किया।
बेंच ने कहा कि अन्य मामलों में भी फॉन्ट, अक्षरों के आकार, लाइन स्पेसिंग और बोल्ड तथा इटैलिक के इस्तेमाल में एकरूपता नहीं दिखाई दे रही है।
इस पर कोर्ट ने स्टाम्प रिपोर्टिंग सेक्शन से स्पष्टीकरण मांगा।
6 अगस्त 2026 को रिव्यू ऑफिसर ने बताया कि इटैलिक में लिखे प्रार्थना खंड को त्रुटि नहीं माना जा सकता था, क्योंकि ऐसा कोई निर्देश मौजूद नहीं था।
इसके बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल से फॉन्ट, स्पेसिंग, चिह्नों और मार्जिन से संबंधित नियमों तथा निर्देशों की रिपोर्ट मांगी।
मौजूदा नियमों में नहीं थी एक समान व्यवस्था
रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट में बताया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट नियमावली, 1952 के अध्याय 13 के नियम 2 में प्रथम अपील की पेपर बुक के लिए डबल स्पेसिंग निर्धारित है।
इसी तरह अध्याय 9 के नियम 6 और 11(4) में एक-चौथाई मार्जिन का प्रावधान है।
हालांकि, नियमावली में किसी विशेष टाइपिंग फॉन्ट का उल्लेख नहीं है।
ई-फाइलिंग निर्देशों में लीगल साइज पेपर, निर्धारित मार्जिन, अंग्रेजी के लिए Arial फॉन्ट साइज 12, हिंदी के लिए Unicode फॉन्ट साइज 14 और डबल लाइन स्पेसिंग निर्धारित थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग के लिए फॉन्ट, साइज, स्पेसिंग तथा बोल्ड और इटैलिक के इस्तेमाल को लेकर एक समान निर्देश नहीं थे।
बेंच ने कहा:
“एकरूपता की कमी दस्तावेजों को पढ़ने की सुगमता और रिकॉर्ड की व्यवस्थित प्रस्तुति को प्रभावित करती है।”
रजिस्ट्रार जनरल को आदेश जारी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश तत्काल इलाहाबाद और लखनऊ के सभी फाइलिंग तथा जांच अनुभागों तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
साथ ही नए निर्देशों की जानकारी अधिवक्ताओं को भी देने को कहा गया है।
दोनों पीठों के स्टाम्प रिपोर्टिंग सेक्शन 12 नवंबर 2026 से इन निर्देशों के अनुसार दस्तावेजों की जांच करेंगे।
हाउस टैक्स की याचिका में भी दिया निर्देश
मूल याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सूर्य प्रकाश शर्मा ने बताया कि विवाद मकान के हाउस टैक्स निर्धारण और उसकी मांग में सुधार से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता 14 जुलाई 2026 को संबंधित अधिकारी को प्रत्यावेदन दे चुका है और अब केवल उस पर निर्णय कराने का निर्देश चाहता है।
कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट की ओर से अधिवक्ता आशीष मिश्रा और चंदन शर्मा उपस्थित हुए। स्थायी अधिवक्ता ने भी इस आधार पर याचिका के निस्तारण पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
बेंच ने नगर आयुक्त, नगर निगम प्रयागराज को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो महीने के भीतर याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर कारणयुक्त और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए।
इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: Sheo Kinkar Singh v. State of U.P. and 2 others
केस नंबर: Writ – C No. 31056 of 2026
पीठ: जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद
फैसले की तारीख: 28 अक्टूबर 2026
