मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल पुलिस जांच या एफआईआर लंबित होने के आधार पर किसी ट्रांसजेंडर महिला के नए नाम से पासपोर्ट आवेदन पर विचार करने से रोका नहीं जा सकता। अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया है कि जेंडर अफर्मेशन सर्जरी के बाद नाम बदलने वाली याचिकाकर्ता के पासपोर्ट नवीनीकरण और री-इश्यू के आवेदन पर आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर कानून और गुण-दोष के आधार पर फैसला किया जाए।
जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने एक ट्रांसजेंडर महिला की याचिका का निपटारा करते हुए 1 सितंबर को यह आदेश जारी किया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होना याचिकाकर्ता के आवेदन पर पहले प्रतिवादी (पासपोर्ट प्राधिकरण) द्वारा विचार किए जाने के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता।
विदेश यात्रा के लिए सक्षम अदालत की अनुमति जरूरी
हाईकोर्ट ने पासपोर्ट आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और विदेश यात्रा करने के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया। अदालत ने कहा कि पासपोर्ट कार्यालय केवल आवेदन पर विचार करने के लिए किसी आपराधिक अदालत की पूर्व अनुमति की शर्त नहीं थोप सकता।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने याचिकाकर्ता को स्वतः विदेश यात्रा की मंजूरी नहीं दी है। यदि वह आपराधिक मामला लंबित रहने के दौरान विदेश यात्रा करना चाहती हैं, तो उन्हें संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली सक्षम आपराधिक अदालत से आवश्यक अनुमति लेनी होगी।
पहचान और जेंडर सर्जरी की होगी गोपनीय जांच
हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने का कोई स्वतः आदेश देने के बजाय पासपोर्ट अधिकारी को कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने को कहा है। अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को याचिकाकर्ता की पहचान को लेकर एक गोपनीय जांच कराने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही, पुलिस को भी निर्देश दिया गया है कि वह याचिकाकर्ता द्वारा कराई गई जेंडर अफर्मेशन सर्जरी और नाम परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया की पुष्टि करते हुए एक विशिष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
अपने इस निर्णय में हाईकोर्ट ने अपने ही एक पूर्व फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि आपराधिक कार्यवाही लंबित रहने के दौरान भी पासपोर्ट नवीनीकरण के आवेदन पर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है और इसके लिए ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनापत्ति जरूरी नहीं है, भले ही विदेश जाने का अधिकार अदालत की अनुमति पर निर्भर हो।
कर्ज माफी प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
अदालत में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, याचिकाकर्ता के पास पहले पुरुष के रूप में उनके मूल नाम से भारतीय पासपोर्ट मौजूद था और वह रोजगार के सिलसिले में विदेश भी जा चुकी थीं। बाद में उन्होंने जेंडर अफर्मेशन सर्जरी कराई और ट्रांसजेंडर महिला के रूप में अपनी पहचान अपनाई।
सर्जरी के बाद उन्होंने अपना नाम बदला और तमिलनाडु सरकार के राजपत्र (गजट) में नाम परिवर्तन को औपचारिक रूप से प्रकाशित कराया। इसके बाद जब उन्होंने नए नाम से पासपोर्ट री-इश्यू कराने के लिए आवेदन किया, तो स्थानीय पुलिस और पासपोर्ट कार्यालय ने एक अनिर्णीत आपराधिक मामले का हवाला देते हुए प्रक्रिया रोक दी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि यह एफआईआर किसानों के कृषि कर्ज माफी की मांग को लेकर हुए एक जन-आंदोलन में शामिल होने के कारण दर्ज की गई थी। वहीं, पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि विरोध प्रदर्शन से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है।

