तेलंगाना के महबूबनगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंकॉक की यात्रा कराने में असफल रहने और ग्राहक के पैसे दबाकर रखने के मामले में एक ट्रैवल एजेंसी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा कि सेवा प्रदान करने से इनकार करने के बाद ग्राहक की धनराशि अपने पास रोके रखना ‘सेवा में कमी’ (डेफिशिएंसी इन सर्विस) का मामला है। इस मामले में आयोग ने ट्रैवल एजेंसी को दंपत्ति द्वारा जमा की गई 30,000 रुपये की अग्रिम राशि वापस करने के साथ-साथ 30,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा और अदालती खर्च अदा करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा विवाद
यह मामला हैदराबाद से बैंकॉक के एक प्रमोशनल टूर पैकेज से जुड़ा है। प्रति व्यक्ति 19,999 रुपये शुल्क वाले इस पैकेज में हैदराबाद-बैंकॉक राउंड-ट्रिप फ्लाइट टिकट, तीन रातों का होटल प्रवास और स्थानीय यात्रा व्यवस्थाएं शामिल थीं। पीड़ित दंपत्ति ने 10 अन्य यात्रियों के समूह के साथ यात्रा करने के लिए 4 सितंबर 2024 को 30,000 रुपये का अग्रिम भुगतान किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रैवल एजेंसी के प्रतिनिधि अधिवक्ता एम. जितेन्द्र रेड्डी ने दलील दी कि पैकेज की शर्तों के अनुसार पूरी राशि का भुगतान 31 अगस्त 2024 तक किया जाना अनिवार्य था। चूंकि दंपत्ति ने भुगतान नियत समय के बाद किया, इसलिए उन्होंने शर्तों का उल्लंघन किया था। एजेंसी का कहना था कि जब अपरिहार्य कारणों से यात्रा की तारीख 21 नवंबर से बढ़ाकर 27 नवंबर 2024 की गई, तो देर से भुगतान करने के कारण दंपत्ति को नए शेड्यूल में शामिल नहीं किया गया और न ही उनके पैसे लौटाए गए।
उपभोक्ता आयोग का रुख और फैसला
आयोग की अध्यक्ष एम. अनुराधा तथा सदस्य के. चंद्रशेखर रेड्डी और के. विजया लक्ष्मी की पीठ ने 15 जुलाई को इस शिकायत पर निर्णय सुनाया। शिकायतकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता के. नागेश कुमार ने पक्ष रखा।
आयोग ने अपने निष्कर्षों में रेखांकित किया कि सख्त भुगतान नीति के बावजूद ट्रैवल एजेंसी ने नियत तिथि के बाद भी दंपत्ति से भुगतान स्वीकार किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि एजेंसी देर से भुगतान के कारण बुकिंग रद्द मान रही थी, तो उसे ग्राहक की रकम अपने बैंक खाते में रखने के बजाय तुरंत वापस कर देनी चाहिए थी।
एजेंसी के इस आचरण को बदनियति और सेवा में लापरवाही मानते हुए आयोग ने निर्देश दिया कि कंपनी पीड़ित दंपत्ति को मूल 30,000 रुपये लौटाए। इसके अलावा, मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के लिए 25,000 रुपये का मुआवजा तथा 5,000 रुपये कानूनी लागत के रूप में चुकाए। आयोग के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि कोई भी ट्रैवल एजेंसी नियमों का हवाला देकर ग्राहक का पैसा रोककर नहीं रख सकती।

