सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने निर्णय दिया है कि एक गैर-हस्ताक्षरकर्ता शेयरधारक, जिसने सेटलमेंट एग्रीमेंट (समझौता ज्ञापन) के व्यापक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक अलग शेयर परचेज एग्रीमेंट (एसपीए) निष्पादित किया है, वह सेटलमेंट में शामिल आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) क्लॉज़ से बाध्य “वास्तविक पक्षकार” (वेरिटेबल पार्टी)
