केंद्र सरकार ने नीट (NEET) परीक्षा में पेपर लीक और धांधली की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए एक बहुस्तरीय सुरक्षा मॉडल और व्यापक ढांचागत सुधार लागू किए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने अनुपालन हलफनामे में बताया है कि नीट-यूजी परीक्षाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए 10-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल (फोर्ट्रेस मॉडल) तैयार किया गया है। इसके साथ ही सार्वजनिक परीक्षा संशोधन अधिनियम 2026 के तहत पेपर लीक और फर्जीवाड़े के दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की कैद और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का कड़ा कानूनी प्रावधान किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शिक्षा मंत्रालय का हलफनामा
जस्टिस पी एस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी संस्थागत व्यवस्था का निर्माण करना है जो पिछली गलतियों से सीख लेते हुए परीक्षा तंत्र को मजबूत बनाए। यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के 29 मई के उस आदेश के अनुपालन में दाखिल किया गया है, जिसमें कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि भविष्य में नीट परीक्षाओं का संचालन किस तरह होगा और परीक्षा एजेंसियों में संस्थागत अनुभव को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा।
मंत्रालय ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि यद्यपि शिक्षा मंत्रालय नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का पर्यवेक्षण करता है, लेकिन नीट परीक्षा का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आग्रह पर एनटीए द्वारा किया जाता है। इसके अलावा, हलफनामे में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में चल रही सीबीआई जांच के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय टास्क फोर्स
परीक्षा प्रणाली को आधुनिक और तकनीकी रूप से अभेद्य बनाने के लिए सरकार ने 27 जुलाई को एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के शिल्पकार नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाला यह पैनल तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपेगा। यह कार्यबल मुख्य रूप से परीक्षा संचालन को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ब्लॉकचेन तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
एआई, ब्लॉकचेन और छह-स्तरीय पैकेजिंग से सुरक्षा
सरकार द्वारा अपनाए गए नए सुरक्षा तंत्र के तहत अनुवाद के स्तर पर पेपर लीक की गुंजाइश खत्म करने के लिए शुरुआती ड्राफ्टिंग के दौरान इंटरनेट से कटे (एयर-गैप्ड) एआई सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके बाद केवल सीमित मानवीय सत्यापन होता है। परीक्षार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए हर प्रश्नपत्र और ओएमआर उत्तर पुस्तिका पर अभ्यर्थी से जुड़ा एक विशिष्ट सीरियल नंबर दर्ज रहता है। प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए छह-स्तरीय टेम्पर-एविडेंट पैकेजिंग और ऐसे स्टील ट्रंक का इस्तेमाल हो रहा है जिनमें एक बार इस्तेमाल होने वाले ताले लगे होते हैं, जिन्हें केवल काटकर ही खोला जा सकता है।
कानून में कड़े प्रावधान और पिछली घटनाएं
केंद्र ने बताया कि संसद ने लोक परीक्षा संशोधन अधिनियम 2026 पारित कर वर्ष 2024 के कानून को और अधिक सख्त बना दिया है। नए संशोधन के तहत पेपर लीक, छद्म रूप से परीक्षा देने (इम्पपर्सनेशन) और कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़ करने जैसे अपराधों के लिए सजा और जुर्माने को काफी बढ़ा दिया गया है।
गौरतलब है कि एनटीए ने 3 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया था, जिसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई थी। इससे पहले 25 मई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए द्वारा पुरानी घटनाओं से सबक न लेने पर निराशा जताई थी और एनटीए के स्थान पर किसी स्वायत्त संस्था से परीक्षा कराने की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र, एनटीए और सीबीआई को नोटिस जारी किया था। इन याचिकाओं में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) द्वारा वकील तन्वी दुबे के माध्यम से दायर अर्जी भी शामिल थी। वर्ष 2024 में नीट-यूजी पेपर लीक के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार करते हुए भविष्य में लीक रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे।

