देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश: आसिया अंद्राबी की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने एनआईए से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिलत’ की प्रमुख आसिया अंद्राबी और उसकी दो सहयोगियों की याचिकाओं पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। तीनों महिला अभियुक्तों ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकवादी संगठन से जुड़े होने के मामले में विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती दी है। हाईकोर्ट की पीठ ने याचिकाओं को दाखिल करने में हुई देरी को दरकिनार करते हुए एनआईए से जवाब तलब किया है।

सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एनआईए को 15 सितंबर तक अपना रुख स्पष्ट करने का समय दिया है। अदालत अभियुक्तों की उस याचिका पर भी विचार कर रही है, जिसमें उन्होंने सजा को निलंबित करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।

निचली अदालत का फैसला और सुनाई गई सजा

विशेष एनआईए अदालत ने इस साल 14 जनवरी को 62 वर्षीय आसिया अंद्राबी, 58 वर्षीय नाहिदा नसरीन और 48 वर्षीय सोफी फहमीदा को दोषी ठहराया था। इसके बाद 24 मार्च को अदालत ने अंद्राबी को उम्रकैद और उसकी दोनों सहयोगियों को 30-30 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इन महिलाओं ने जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने के लिए एक संगठित अभियान चलाया था।

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गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हुआ था मामला

तीनों आरोपियों पर फरवरी 2021 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। विशेष अदालत ने उन्हें यूएपीए की धारा 18 (साजिश) और धारा 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता) के तहत दोषी पाया। इसके अलावा उन्हें आईपीसी की धारा 121-ए (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश), 120बी (आपराधिक साजिश), 153ए (समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाना), 153बी (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले बयान) और 505 (सार्वजनिक रूप से उपद्रव फैलाना) के तहत भी दोषी ठहराया गया था।

निचली अदालत की तल्ख टिप्पणी

सजा सुनाते समय विशेष अदालत के जज ने टिप्पणी की थी कि अभियुक्तों ने अपने किए पर कोई पछतावा नहीं दिखाया, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि उन्हें अपने कृत्यों पर गर्व है और वे इसे जारी रखेंगी। जज ने अपने आदेश में कहा था कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी बरतने से देश के एक अभिन्न हिस्से को अलग करने की मंशा रखने वाले तत्वों का हौसला बढ़ेगा।

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मामले की पृष्ठभूमि और एनआईए की जांच

यह मामला अप्रैल 2018 का है, जब केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने वर्ष 1987 में गठित दुख्तरान-ए-मिलत और उसकी संस्थापक आसिया अंद्राबी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, यह प्रतिबंधित संगठन मीडिया मंचों का उपयोग करके भड़काऊ भाषण देता था, हिंसा के लिए उकसाता था और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने व जिहाद के नाम पर युवाओं को भड़काने में शामिल था।

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एनआईए ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि अंद्राबी और उसकी सहयोगियों ने भारत सरकार के प्रति नफरत और वैमनस्य फैलाने के लिए प्रचार सामग्री तैयार की तथा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से मदद लेकर भारत के खिलाफ साजिश रची। इससे पहले, अप्रैल 2018 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग में विरोध प्रदर्शनों और पथराव की साजिश रचने के आरोप में अंद्राबी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

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