चेक-इन बैग में टूटी 35 हजार की शराब की बोतल: इंडिगो पर लगा 55 हजार रुपये का जुर्माना, उपभोक्ता आयोग ने ठहराया लापरवाही का दोषी

हैदराबाद के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) को सेवा में गंभीर लापरवाही और अनुचित शर्तों का दोषी ठहराते हुए एक यात्री को 55,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला दिल्ली से चेन्नई की यात्रा के दौरान यात्री के चेक-इन सामान में रखी 35,000 रुपये की प्रीमियम शराब की बोतल टूटने से जुड़ा हुआ है।

आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सुरक्षित रूप से पैक की गई नाजुक वस्तुओं को स्वीकार करने के बाद एयरलाइन मानक डिस्क्लेमर की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 3 सितंबर 2025 की है, जब यात्री विनीत मद्दाला ने इंडिगो की उड़ान से दिल्ली से चेन्नई का सफर किया था। शिकायत के अनुसार, मद्दाला ने दिल्ली हवाई अड्डे पर चेक-इन के दौरान एयरलाइन कर्मचारियों को सूटकेस में रखी सीलबंद शराब की बोतल के बारे में सूचित किया था ताकि उसके साथ सावधानी बरती जाए। हालांकि, चेन्नई पहुंचने पर जब उन्होंने अपना बैग हासिल किया, तो बोतल पूरी तरह चकनाचूर पाई गई।

इसके बाद मद्दाला ने ईमेल के जरिए इंडिगो ग्राहक सेवा विभाग से संपर्क कर ग्राउंड स्टाफ की लापरवाही की शिकायत की और नुकसान की भरपाई की मांग की। एयरलाइन ने स्वीकार किया कि बोतल चेक-इन के समय ठीक से पैक और सील थी। हालांकि, अपनी नीति का हवाला देते हुए इंडिगो ने कहा कि कांच जैसी नाजुक वस्तुएं यात्री के खुद के जोखिम पर ही ले जाई जाती हैं। परिचालनगत कारणों को नुकसान की वजह बताते हुए एयरलाइन ने केवल 500 रुपये का ट्रैवल वाउचर देने की पेशकश की।

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एयरलाइन का रुख और आयोग की एकतरफा कार्रवाई

अपनी वकील पी. संतोषी कुमारी के माध्यम से भेजा गया कानूनी नोटिस बेअसर रहने पर मद्दाला ने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। आयोग के अध्यक्ष एम. रामगोपाल रेड्डी और सदस्य जे. श्यामला तथा डी. माधवी लता की पीठ ने मामले की सुनवाई की। नोटिस मिलने के बावजूद इंडिगो की ओर से निर्धारित समय में कोई लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिसके बाद आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया।

1 जुलाई को दिए गए अपने आदेश में आयोग ने टिप्पणी की कि किसी सूटकेस के भीतर सुरक्षित रखी गई बोतल सामान्य परिवहन के दौरान तब तक नहीं टूट सकती जब तक कि ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ द्वारा उसे जोर से फेंका, गिराया या अनुचित तरीके से न संभाला गया हो। पीठ ने माना कि जब कोई एयरलाइन जांच के बाद विधिवत पैक की गई नाजुक वस्तु को स्वीकार करती है, तो उसकी जवाबदेही बढ़ जाती है। ऐसे में ‘यात्री के अपने जोखिम पर’ जैसी शर्तों की आड़ लेकर एयरलाइन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।

मुआवजे और ब्याज का भुगतान करने का आदेश

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35,000 रुपये के वास्तविक नुकसान के बदले महज 500 रुपये का टोकन वाउचर देने की पेशकश को आयोग ने एक अनुचित अनुबंध करार दिया।

आयोग ने इंडिगो को निर्देश दिया है कि वह यात्री को नष्ट हुई शराब की बोतल की मूल कीमत 35,000 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके अलावा, मानसिक उत्पीड़न और परेशानी के एवज में 15,000 रुपये तथा कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

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