सुप्रीम कोर्ट भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज, सीजेआई सूर्यकांत बोले, यह फैसला कोर्ट खुद करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट भवन के मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक चक्र) स्थापित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिसर में क्या लगाया जाएगा, यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में स्वयं करेगा।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता एवं स्वयं पैरवी कर रहे बदरावदा वेणुगोपाल उर्फ बाबा खतरनाक की अपील खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के गेट पे क्या लगाना है हम देख लेंगे… आप दुनिया में इतनी समस्याएं हैं उनका ध्यान रखिए।”

विवाद की पृष्ठभूमि

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बदरावदा वेणुगोपाल ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाए जाने का निर्देश देने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह मुद्दा अदालतों की “संवैधानिक पहचान” से जुड़ा हुआ है।

23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका का निस्तारण करते हुए कहा था कि यह मूलतः प्रशासनिक स्तर पर विचार किए जाने वाला विषय है। इसके साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सचिव जनरल को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष इस संबंध में उपयुक्त नोट रखने का निर्देश दिया था।

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रजिस्ट्रार के आदेश को दी थी चुनौती

इसके बाद वेणुगोपाल ने 23 मार्च के प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन और राष्ट्रीय प्रतीक स्थापित किए जाने की प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति जानने के लिए एक आवेदन दायर किया।

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, यह आवेदन 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के तहत रजिस्ट्रार द्वारा दर्ज किया गया। इसके बाद वेणुगोपाल ने रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ अपील दायर की, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।

प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में दखल से इनकार

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सुनवाई के दौरान पीठ ने रजिस्ट्रार के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में क्या प्रदर्शित या स्थापित किया जाएगा, यह पूरी तरह अदालत के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विषय है और इस संबंध में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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