देश की राजधानी में हाल ही में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में नागरिकों के घायल होने के बाद, भीड़ नियंत्रण के लिए पेलेट गन और धातु वाले प्रोजेक्टाइल हथियारों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दो नागरिकों— प्रशांत कुमार तथा शेख इरशाद मंसूरी ने अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से यह याचिका प्रस्तुत की है।
हथियारों को हटाने और मुआवजे की मांग
याचिका में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा नागरिक सभाओं को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ‘पंप-एक्शन गन’ और ‘प्रोजेक्टाइल एक्शन गन’ (PAG) को पूरी तरह से सेवा से हटाने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही, याचिकाकर्ताओं ने 20 जुलाई को नई दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान पेलेट लगने से घायल हुए सभी पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज, पुनर्वास और भारी मुआवजे का निर्देश देने की भी मांग की है।
संसद चलो मार्च के दौरान हुई घटना
यह मामला 20 जुलाई 2026 को नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च से जुड़ा हुआ है। प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की मदद ली थी। याचिका के अनुसार, उस दिन शाम 4:00 से 4:30 बजे के बीच सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को कनाट प्लेस के इनर सर्किल की ओर खदेड़ दिया।
बिना चेतावनी और बिना उकसावे के गोलीबारी का आरोप
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस या आरएएफ ने बल प्रयोग करने से पहले कोई चेतावनी नहीं दी और ना ही पानी की बौछार (वाटर कैनन) का इस्तेमाल किया। जब प्रदर्शनकारी हाथ उठाकर पीछे हट रहे थे, तब आरएएफ कर्मियों ने अचानक पंप-एक्शन गन से गोलियां चला दीं। इससे छर्रे (पेलेट) छितराकर दूर तक फैले और कई लोगों के शरीर में जा घुसे, जिससे वे तुरंत खून से लथपथ हो गए।
घायलों में शामिल 25 वर्षीय कलाकार प्रशांत कुमार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के रूप में शामिल हुए थे, जबकि 26 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी पासपोर्ट और वीजा से जुड़े काम के सिलसिले में कनाट प्लेस में मौजूद थे। याचिका में कहा गया है कि दोनों में से किसी भी व्यक्ति ने सुरक्षा बलों को नहीं उकसाया था, फिर भी वे पेलेट गन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन और कानूनी तर्क
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में पेलेट गन के इस्तेमाल को असंवैधानिक बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि छर्रों की अनिश्चित और अनियंत्रित दिशा के कारण यह हथियार अत्यधिक खतरनाक और मनमाना है। यह कानून के तहत तय ‘न्यूनतम आवश्यक बल’ के मानक पर खरा नहीं उतरता।
याचिका में कहा गया है कि संविधान के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण सभा करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है, जिस पर अनुच्छेद 19(3) के तहत केवल ‘आवश्यकता और आनुपातिकता’ के कानूनी सिद्धांतों के आधार पर ही उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पेलेट गन इन दोनों सिद्धांतों को पूरा करने में विफल रहती है, इसलिए नागरिक सभाओं के खिलाफ इसके इस्तेमाल को पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए।

