नई इलेक्ट्रिक कार बार-बार बंद होने पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश: एमजी मोटर और डीलर को ₹19 लाख से अधिक लौटाने का निर्देश

चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चार दिनों के भीतर दो बार सड़क पर बंद हुई नई इलेक्ट्रिक कार के मामले में जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया और डीलरशिप कृष्णा ऑटोमोबाइल्स को सेवा में गंभीर कोताही का दोषी पाया है। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से ग्राहक को कार की कीमत, एक्सेसरीज और मुआवजे समेत 19 लाख रुपये से अधिक की राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का फैसला सुनाया है।

आयोग का फैसला और रिफंड का आदेश

आयोग के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह सिद्धू और सदस्य बी एम शर्मा की पीठ द्वारा 17 जून को जारी आदेश के अनुसार, कंपनी और डीलर को शिकायतकर्ता पुखराज सिंह बल को 18.49 लाख रुपये की राशि 23 जुलाई 2025 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटानी होगी। इसके अलावा, कार एक्सेसरीज के मद में चुकाए गए 57,690 रुपये पर 24 जुलाई 2025 से 9 प्रतिशत ब्याज और मानसिक उत्पीड़न एवं अदालती खर्च के एवज में 50,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। इन सभी भुगतानों को 45 दिनों की समयावधि के भीतर पूरा करना अनिवार्य है।

चार दिन में दो बार बंद हुई नई गाड़ी

मामले के अनुसार, चंडीगढ़ निवासी पुखराज सिंह बल ने 23 जुलाई 2025 को 19.07 लाख रुपये में विंडसर ईवी एसेंस प्रो (Windsor EV Essence Pro) कार खरीदी थी, जिसके लिए उन्होंने एचडीएफसी बैंक से लोन भी लिया था। डिलीवरी मिलने के महज चार दिन बाद, 27 जुलाई 2025 को जब वह अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे, तब कार अचानक सड़क के बीचों-बीच बंद हो गई। इस वजह से पीछे से आ रही एक अन्य गाड़ी ने उनकी कार में टक्कर मार दी।

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उसी दिन शाम को कार दोबारा बंद हो गई, जिससे बल को अपनी यात्रा अधूरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद वाहन को क्रेन से खींचकर डीलरशिप के वर्कशॉप पहुंचाया गया। 14 अगस्त 2025 को जब ग्राहक को टेस्ट ड्राइव के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने देखा कि वर्कशॉप की कस्टडी में रहने के दौरान गाड़ी को अतिरिक्त नुकसान भी पहुंचाया गया था।

डीलर और कार निर्माता की दलीलें खारिज

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील गौरव कांत गोयल ने तर्क दिया कि बार-बार गाड़ी का बंद होना एक गंभीर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ी। वहीं वर्कशॉप में गाड़ी को नुकसान पहुंचाना डीलर की लापरवाही को दर्शाता है।

डीलरशिप कृष्णा ऑटोमोबाइल्स के वकील जगवीर शर्मा ने दावा किया कि कार के एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) ने आगे किसी रुकावट को भांपकर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाए थे, जिसके कारण पीछे से टक्कर हुई। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच में कोई यांत्रिक या इलेक्ट्रिकल खराबी नहीं मिली और वर्कशॉप में हुआ नुकसान थर्ड पार्टी की सफाई के दौरान हुआ था, जिसकी मुफ्त मरम्मत की पेशकश की गई थी।

दूसरी ओर, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया के वकील गुरशेर सिंह भंडाल ने दलील दी कि डीलर के साथ उनका करार ‘प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल’ आधार पर है, इसलिए निर्माता और ग्राहक के बीच कोई सीधा अनुबंध नहीं बनता। कंपनी ने यह भी कहा कि बीमा दावे का मंजूर होना यह साबित करता है कि यह एक दुर्घटना थी, न कि वारंटी के तहत आने वाला मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट।

तकनीकी सबूत न देने पर आयोग की टिप्पणी

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उपभोक्ता आयोग ने इन सभी तर्कों को अमान्य घोषित कर दिया। पीठ ने रेखांकित किया कि न तो निर्माता और न ही डीलर ने यह साबित करने के लिए कोई डायग्नोस्टिक रिपोर्ट, इवेंट डेटा रिकॉर्डर लॉग या किसी विशेषज्ञ की तकनीकी राय पेश की कि कार का ADAS सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा था।

आयोग ने स्पष्ट किया कि डीलर द्वारा पेश की गई आंतरिक निरीक्षण रिपोर्ट एकतरफा तैयार की गई थी, जिसमें वाहन मालिक को न तो सूचित किया गया और न ही शामिल किया गया, इसलिए इसे स्वतंत्र साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, घटना के समय कार केवल 485 किलोमीटर चली थी और अपनी तीन साल की वारंटी अवधि के भीतर बिल्कुल नई थी।

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निर्माता कंपनी की जवाबदेही पर आयोग ने कहा कि चूंकि जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ही वारंटी जारी करती है और डीलर उसका अधिकृत बिक्री व सर्विस नेटवर्क है, इसलिए वह ग्राहक के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

पीठ ने टिप्पणी की कि 19 लाख रुपये से अधिक खर्च करके नई कार खरीदने वाला ग्राहक सुरक्षित और लगातार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करता है। खरीद के तुरंत बाद उपभोक्ता को बार-बार वारंटी मरम्मत स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

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