कन्नड़ फिल्म ‘बॉस’ की रिलीज को कर्नाटक हाईकोर्ट की हरी झंडी, अभिनेता दर्शन की याचिका खारिज

कन्नड़ फिल्म ‘बॉस’ की रिलीज के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने इसके प्रदर्शन का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने मामले में जेल में बंद अभिनेता दर्शन थूगुदीपा और उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी की अपील को अस्वीकार कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिल्म प्रदर्शित होने से चल रहे आपराधिक मुकदमे में निष्पक्ष सुनवाई का अभिनेता का संवैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होगा।

जस्टिस प्रदीप सिंह यूरूर की एकल पीठ ने 17 जुलाई को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत कलात्मक अभिव्यक्ति और रचनात्मक स्वतंत्रता को तब तक नहीं रोका जा सकता, जब तक कि वह कानूनी सीमाओं का उल्लंघन न करे। अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि किसी सिनेमाई चित्रण से मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारी प्रभावित हो जाएंगे।

अभिव्यक्ति की आजादी और निष्पक्ष सुनवाई का संतुलन

जून 2024 से जेल में बंद अभिनेता दर्शन और उनकी पत्नी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हटा दी थी। दर्शन, जिन्हें प्रशंसक ‘डी-बॉस’ और ‘चैलेंजिंग स्टार’ के नाम से जानते हैं, का तर्क था कि ‘सच्ची घटनाओं से प्रेरित’ के दावे के साथ शुरू होने वाली यह फिल्म अभियोजन पक्ष के दावों का नाटकीय रूपांतरण है। उन्होंने दावा किया था कि अभी मामला अदालत में लंबित है और कोई अंतिम फैसला नहीं आया है, ऐसे में फिल्म के प्रदर्शन से उनके अनुच्छेद 21 के तहत गोपनीयता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हनन होगा।

इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी फिल्म के निर्माण में बहुत सोच-विचार और भारी वित्तीय निवेश होता है। फिल्म की रिलीज को रोकने या टालने से निर्माताओं को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

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पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और सेंसर बोर्ड की भूमिका

अदालत ने कहा कि इस मामले की जांच और सुनवाई से जुड़ी तमाम जानकारियां पहले से ही प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जनता के सामने आ चुकी हैं। चूंकि ये तथ्य पहले से ही पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं, इसलिए फिल्म से किसी के गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फिल्म अभिनेता की पूरी जीवनगाथा नहीं है, हालांकि इसमें वास्तविक घटनाओं से मिलती-जुलती कुछ बातें शामिल हो सकती हैं।

सेंसर बोर्ड (CBFC) की मंजूरी पर हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड जैसी वैधानिक और विशेषज्ञ संस्था द्वारा मूल्यांकन के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाने के बाद अदालतों को उसके ऊपर ‘सुपर सेंसर बोर्ड’ की तरह काम नहीं करना चाहिए।

क्या है रेणुकास्वामी हत्याकांड से जुड़ा पूरा मामला?

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यह कानूनी विवाद सीरी प्रोडक्शंस द्वारा बनाई गई फिल्म ‘बॉस’ से जुड़ा है, जिसका निर्देशन लावा वी ने किया है। फिल्म को पहले 24 अप्रैल को रिलीज किया जाना था, लेकिन अभिनेता के हस्तक्षेप के बाद निचली अदालत ने इस पर अस्थायी रोक लगा दी थी। बाद में 2 जून को ट्रायल कोर्ट ने रोक हटाते हुए रिलीज की अनुमति दे दी थी, जिसे दर्शन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

गौरतलब है कि अभिनेता दर्शन अपने प्रशंसक रेणुकास्वामी की हत्या के आरोप में हिरासत में हैं। रेणुकास्वामी का शव जून 2024 में बेंगलुरु के एक नाले के पास मिला था। जांच अधिकारियों के अनुसार, रेणुकास्वामी ने दर्शन की महिला मित्र पवित्रा गौड़ा को सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश भेजे थे, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।

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