सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को देश भर में रिलीज करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस फिल्म को आगामी 28 जुलाई या उसके बाद सिनेमाघरों में रिलीज किया जा सकेगा। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है, जिसने फिल्म के प्रदर्शन पर अस्थाई रोक लगा दी थी। यह फिल्म पहले शुक्रवार को ही रिलीज होने वाली थी।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फिल्म की स्क्रीनिंग को अपनी मंजूरी दी। बेंच ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर किया कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) पहले ही इस फिल्म को सर्टिफिकेट दे चुका है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि यह एनिमेटेड फिल्म एक ऐसी वेब सीरीज पर आधारित है जो पहले से ही यूट्यूब पर सबके लिए उपलब्ध है।
अदालत के इस रुख के बाद अब यह फिल्म भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा उत्सव संपन्न होने के बाद सिनेमाघरों में पहुंचेगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को जानकारी दी कि ओडिशा और देश के अन्य हिस्सों में गुरुवार से ही वार्षिक रथयात्रा शुरू हो चुकी है। फिल्म की निर्माता कंपनी ‘एली एनिमेशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
विवाद की मुख्य वजह
यह पूरा कानूनी विवाद उड़ीसा हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के बाद शुरू हुआ था। यह याचिका अनुगुल के महेश कुमार साहू, पुरी के डॉ. प्रमोद कुमार आचार्य और निमापाड़ा के उमाशंकर आचार्य ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग को रोकने और सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा इसे दिए गए सर्टिफिकेट को रद्द करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के बचपन के काल्पनिक चित्रण, संवादों और युद्ध के दृश्यों को जिस तरह दिखाया गया है, वह पारंपरिक मंदिर प्रथाओं और ऐतिहासिक ग्रंथों के विपरीत है। उन्होंने विशेष रूप से स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण की मान्यताओं का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले, हाईकोर्ट ने कहा था कि फिल्म में भगवान के चित्रण को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले विस्तृत न्यायिक समीक्षा की जरूरत है।

