पत्नी की हत्या के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटा, पति समेत पांच दोषियों को उम्रकैद

कलकत्ता हाईकोर्ट ने साल 2006 में एक महिला की जहर देकर हत्या करने के मामले में उसके पति और चार अन्य रिश्तेदारों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में मृतका के बेटे की गवाही को मुख्य आधार माना, जो घटना के वक्त महज 12 साल का था और जिसने अपनी मां की हत्या को अपनी आंखों से देखा था।

जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस राय चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मुख्य दोषी समीर दास, उसके बड़े भाई समर दास, समर की पत्नी सबीता, और रिश्तेदारों संजय प्रमाणिक व झरना प्रमाणिक को कम से कम 24 साल की सश्रम सजा काटने के बाद ही समय से पहले रिहाई (माफी) की अर्जी देने का अधिकार होगा। इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने मृतका के पति समीर दास को घरेलू हिंसा (आईपीसी की धारा 498ए) के तहत दोषी पाते हुए एक साल के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भी सुनाई है।

बच्चे की गवाही पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

खंडपीठ ने अपने 41 पन्नों के फैसले में कहा कि अपनी मां की मौत का गवाह बनने वाला नाबालिग बच्चा भी इस अपराध का उतना ही बड़ा पीड़ित है। अदालत ने कहा कि एक बच्चे के लिए अपने ही पिता, ताऊ और ताई के हाथों अपनी मां की मौत देखना बेहद असामान्य और दर्दनाक घटना है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें बच्चे को संदेहास्पद गवाह माना गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे का अपने ही पिता और रिश्तेदारों को झूठा फंसाने का कोई मकसद नहीं था।

हत्या और सबूत मिटाने की वारदात

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, पेशे से किसान समीर दास अपनी पत्नी को मायके से पैसे न लाने के कारण लगातार प्रताड़ित करता था। 6 जुलाई 2006 की रात को समीर ने पत्नी के साथ मारपीट की और उसे जहर दे दिया। वारदात के समय समीर के भाई समर दास, भाभी सबीता दास, और रिश्तेदार झरना प्रमाणिक, शंकर प्रमाणिक व संजय प्रमाणिक भी घर में मौजूद थे। जब पीड़ित महिला ने पानी मांगा, तो सबीता ने पानी के बजाय जहर लाकर समीर को सौंप दिया, जिसे समीर ने जबरन महिला के मुंह में डाल दिया। इसके बाद, वारदात को छुपाने के लिए झरना प्रमाणिक और शंकर प्रमाणिक ने पीड़ित महिला की उल्टी से सनी साड़ी को बदल दिया ताकि सबूत मिटाए जा सकें। इस पूरी खौफनाक वारदात को महिला का 12 वर्षीय बेटा बिस्तर के नीचे छिपकर देख रहा था।

आत्महत्या का दावा खारिज

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बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि महिला ने दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में बसने से पति के इनकार के कारण खुद जहर खाकर आत्महत्या की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि बेटे की गवाही से साफ है कि उसकी मां ने जबरन पिलाए गए जहर को बाहर उगलने की कोशिश की थी, जिससे साफ होता है कि यह आत्महत्या या आत्महत्या के लिए उकसाने (आईपीसी की धारा 306) का मामला नहीं है।

केस की पृष्ठभूमि

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यह पूरा मामला दक्षिण 24 परगना जिले के उस्थी थाने में मृतका के भाई द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से शुरू हुआ था। इसके बाद, डायमंड हार्बर की फास्ट ट्रैक कोर्ट (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय) ने 30 मार्च 2017 को सभी पांचों आरोपियों को हत्या और घरेलू हिंसा के आरोपों से बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ मृतका के भाई ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह अंतिम फैसला सुनाया।

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