सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से नाम हटा दिए जाने के बाद भी नागरिक राशन जैसी आवश्यक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी लाभों के हकदार बने रहेंगे। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के एक निवासी को अपना राशन कार्ड रद्द होने से बचाने के लिए संबंधित राज्य के हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ पश्चिम बंगाल के रहने वाले मोहिबुल्ला मंडल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मंडल ने अदालत से हस्तक्षेप करने की मांग की थी ताकि मतदाता सूची से उनका नाम कटने के बाद उनके राशन कार्ड को निलंबित या रद्द होने से रोका जा सके।
याचिकाकर्ता मोहिबुल्ला मंडल की यह चिंता पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा बीते 4 जून को जारी एक आदेश के बाद शुरू हुई थी। उन्हें डर था कि हाल ही में मतदाता सूची के संशोधन के दौरान उनका नाम हटाए जाने के कारण अब उनसे राशन का अधिकार भी छीन लिया जाएगा।
हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जोर देकर कहा कि इस तरह की शिकायतों का निपटारा करने के लिए राज्यों के हाईकोर्ट पूरी तरह सक्षम और अधिकार संपन्न हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि मतदाता का दर्जा खो देने के बाद भी नागरिक कुछ लाभों के हकदार होते हैं, लेकिन इन अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए संबंधित हाईकोर्ट ही सबसे उपयुक्त मंच हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने शीर्ष अदालत से इस मुद्दे पर कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस तरह के कई अन्य मामले सामने आने की संभावना है।
इसके जवाब में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भरोसा दिलाया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट ऐसे सौ मामलों में भी स्थिति स्पष्ट करेगा। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि देश के हाईकोर्ट इन मामलों को खुद ही प्रभावी ढंग से सुलझा लेंगे और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ट्रिब्यूनल में लंबित अपील
पीठ ने इस बात पर भी गौर किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के फैसले के खिलाफ मंडल की एक अपील सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष पहले से ही लंबित है।
शीर्ष अदालत ने संबंधित ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई तेज करे और अधिमानतः दो महीने के भीतर अपना फैसला सुनाए। अदालत ने कहा कि यदि ट्रिब्यूनल का निर्णय मंडल के पक्ष में आता है, तो राशन कार्ड को लेकर चल रही वर्तमान कानूनी लड़ाई का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा और यह स्वतः समाप्त हो जाएगी।

