सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर के बुजुर्ग माता-पिता को राहत, हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 70 लाख रुपये किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक सड़क दुर्घटना में अपने 30 वर्षीय बेटे को खोने वाले बेंगलुरु के एक बुजुर्ग दंपति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा तय किए गए करीब 22 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 70 लाख रुपये से अधिक करने का फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने माना कि मृतक एक होनहार पेशेवर था और उसका करियर व आय लगातार बेहतर हो रहे थे।

जस्टिस जयंत बनर्जी और जस्टिस तारा वितास्ता गंजू की खंडपीठ ने 71 वर्षीय एस श्रीधरन और 68 वर्षीय एस भुवनेश्वरी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह निर्णय दिया। बुजुर्ग दंपति ने ट्रिब्यूनल के साल 2022 के आदेश को चुनौती देते हुए मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने न केवल कुल मुआवजा बढ़ाकर 70,06,990 रुपये कर दिया, बल्कि याचिका दायर होने की तारीख से मिलने वाले ब्याज को भी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत सालाना कर दिया है।

यह मामला भास्करन एस. की मृत्यु से जुड़ा है, जो पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। 9 अप्रैल 2019 को गोवा से बेंगलुरु की बस यात्रा के दौरान एक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई थी।

हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आकलन को पलटा

इससे पहले मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने रिकॉर्ड पर आयकर रिटर्न (आईटीआर) न होने की बात कहकर मृतक की आय को काल्पनिक (नोशनल इनकम) मान लिया था। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल ने 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 22,17,550 रुपये का मुआवजा तय किया था।

READ ALSO  कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की राहत योजना पर रोक 30 जनवरी तक बढ़ाई

हालांकि, हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के इस निष्कर्ष को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि माता-पिता ने अपने बेटे के पिछले तीन वर्षों के आयकर रिटर्न पेश किए थे, जो स्पष्ट रूप से उसकी आय में लगातार हो रही वृद्धि को दर्शाते हैं। खंडपीठ ने कहा कि मृतक एक मेधावी छात्र था और 2010 में स्नातक करने के बाद से लगातार सक्रिय रूप से काम कर रहा था। अदालत ने यह भी माना कि एकलौते कमाने वाले बेटे को खोने के बाद बुजुर्ग माता-पिता पर गृह ऋण (होम लोन) और अन्य दैनिक खर्चों का भारी वित्तीय बोझ आ गया था।

सराहनीय करियर और परिवार के प्रति जिम्मेदारी

READ ALSO  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी पत्नी के साथ अवैध संबंध रखने के कारण व्यक्ति की हत्या करने वाले को दी जमानत

अदालत के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों से मृतक भास्करन के शानदार करियर ग्राफ की पुष्टि हुई। साल 2010 में स्नातक होने के बाद उन्होंने डेल (Dell) कंपनी में काम किया। इसके बाद 2012 से 2015 तक उन्होंने चेन्नई में सीएसएस (CSS) के साथ काम किया, जहां उन्हें उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत कर अमेरिका भेजा गया था। बाद में वह ओरेकल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में टेक्निकल एनालिस्ट के पद पर शामिल हुए, जहां उनका मासिक वेतन 61,079 रुपये था।

भास्करन ने खुद का लॉजिस्टिक्स बिजनेस शुरू करने के लिए 2 जनवरी 2018 को ओरेकल से इस्तीफा दे दिया था। इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने लगभग 1 लाख रुपये की आय हो रही थी। वह भविष्य में कनाडा में बसने की इच्छा भी रखते थे।

READ ALSO  स्कूल में 3-वर्षीय बच्चे का यौन उत्पीड़न: दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि इस तरह के दुर्व्यवहार के प्रति उसकी कोई सहनशीलता नहीं है

वह अपने परिवार की वित्तीय जरूरतों का पूरा ध्यान रख रहे थे। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, वह अपने माता-पिता के लिए खरीदे गए घर के होम लोन की 10,500 रुपये की मासिक किस्त (ईएमआई) नियमित रूप से चुका रहे थे। इसके अलावा, हादसे से महज तीन महीने पहले, 3 जनवरी 2019 को उन्होंने अपनी मां के साथ एक संयुक्त सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) खाते में 7 लाख रुपये जमा किए थे।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles