सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक निजी डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। आरोपी प्रोफेसर पर बीडीएस प्रथम वर्ष के एक छात्र को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी शिक्षक छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार करके कानून के दायरे से बचकर नहीं निकल सकता।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया। प्रोफेसर ने केरल हाईकोर्ट के जून 2026 के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था।
छात्रों के साथ ऐसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की जिम्मेदारी और उनके आचरण पर गंभीर टिप्पणी की। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि समाज और शैक्षणिक संस्थानों में यह कड़ा संदेश जाना बेहद जरूरी है कि कोई भी शिक्षक छात्रों के साथ इस तरह का अमर्यादित व्यवहार नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने कृत्य का छात्रों पर पड़ने वाले परिणाम का अहसास होना चाहिए।
क्लासरूम में अपमान का गंभीर मानसिक असर
यह पूरा मामला डेंटल कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र नितिन राज की मौत से जुड़ा है। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से आने वाले नितिन राज बीती 10 अप्रैल को कॉलेज परिसर की एक इमारत से गिर गए थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपी प्रोफेसर एम कोंडंडा राम ने क्लासरूम के भीतर नितिन को दूसरे सहपाठियों के सामने मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया था। हालांकि, प्रोफेसर राम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।
अदालत ने सार्वजनिक रूप से छात्र को नीचा दिखाए जाने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। पीठ ने सवाल उठाया कि अगर किसी छात्र को उसके साथियों के सामने क्लासरूम में इस तरह अपमानित किया जाए, तो उसके मन-मस्तिष्क पर इसका कितना भयावह असर होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

